मंडी। समाज में धारणा रही है कि पुरुष ही परिवार का पालन पोषण करेगा और माता पिता के कारोबार को संभालेगा। शिक्षा और जागरूकता से आज महिलाओं ने इस धारणा को बदल दिया है। आज महिलाएं और बेटियां पुरुषों से एक कदम आगे बढ़ कर समाज में अलग पहचान बनाए हुए हैं।
मंडी शहर की महिका ने भी पिता के कारोबार को अपनाकर इस धारणा को झुठलाया है। महिका के पिता नरेंद्र थापर ने इंदिरा मार्केट मंडी में ऑडियो सीरिज से काम शुरू किया था, जो आगे चल कर मोबाइल, पेन ड्राइव, मेमोरी कार्ड में बदल दिया था। कुछ वर्ष पूर्व पिता का निधन होने से कारोबार बिखर गया।
ऐसे में इकलौती बेटी महिका जिसने पंजाब विश्वविद्यालय से मनोविज्ञान स्नातक किया है, ने अपने पिता के इस बिखरते कारोबार को अपना कर परिवार का सहारा बनी। महिका का कहना है कि कोई भी काम छोटा-बड़ा नहीं होता, आप उसे किस तरह से करते हैं यह बड़ी बात है। कारोबार की समझ न होने से शुरुआती तीन माह तक परेशानी हुई।
कभी पिता के साथ काम करने वाले एक सेल्जमैन ने उन्हें हौसला देते हुए काम समझाया। उनकी माता ममता थापर शैलून चलाती हैं। पति के निधन के बाद वह दुविधा में थी कि अपना काम देखें या पति के कारोबार को संभालें। ऐसे में महिका ने बेटा बन कर पिता के कारोबार और मां को संभाल कर शहरवासियों के लिए मिसाल कायम की।
मनोविज्ञान स्नातक होने के साथ-साथ महिका ने लुधियाना से इंटर नेशनल मेकअप कोर्स किया है और अब इसमें मास्टर डिग्री करना चाहती है। मोबाइल कारोबार के साथ-साथ वह माता के कारोबार में भी हाथ बंटाती हैं। मेकअप कोर्स के लिए वह कुछ युवतियों को प्रशिक्षण भी दे रही हैं। महिका का कहना है कि यदि औरत को स्वयं पर विश्वास है और वह कुछ अलग करना चाहती है तो उसके लिए कुछ भी असंभव नहीं है।
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