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हिमाचल: क्रिप्टो ट्रेडिंग के नाम पर करोड़ों की ठगी, यूपी से नेपाल तक फैला नेटवर्क; जानें विस्तार से

Fri, 18 Sep 2026 09:51 AM IST
Ankesh Dogra संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी।

सार

मंडी में क्रिप्टो ट्रेडिंग के नाम पर निवेशकों से कथित तौर पर करोड़ों रुपये की ठगी के मामले में पुलिस जांच आगे बढ़ रही है। जांच के अनुसार आरोपी ने वर्ष 2025 में कमांद में कंपनी खोलकर लोगों को 60 से 70 दिन में रकम दोगुनी करने का लालच दिया। शुरुआती निवेशकों को खाते में बढ़ी हुई रकम दिखाकर उनका भरोसा जीता जाता था। जानें विस्तार से...
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : Adobestock
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विस्तार
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क्रिप्टो ट्रेडिंग के नाम पर निवेशकों से करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले आरोपी का नेटवर्क यूपी और नेपाल तक है। यहां भी शातिर ठगी को अंजाम दे चुका है। पुलिस की जांच में यह खुलासा हुआ है। आरोपी मुख्य तौर संस्थान के आसपास ही अपना कार्यालय खोलकर निवेशकों को रिझाता था। निवेशकों को टारगेट में रखते हुए ही कार्यालय की लोकेशन रहती थी। आरोपी ने लोगों को फंसाने के लिए ऐसा जाल बिछाता था कि शुरुआती चरण में निवेश करने वाले खुद ही उसके लिए नए ग्राहक जुटाने लगे। आरोपी निवेशकों को एक से दो घंटे में ही उनके निवेश पर दोगुना मुनाफा दिखा देता। खाते में रकम बढ़ी हुई देखकर निवेशकों का भरोसा मजबूत हो जाता। 

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इसके बाद वे खुद और पैसा लगाने के साथ अपने परिचितों को भी निवेश के लिए तैयार करते। आरोपी ने वर्ष 2025 में कमांद में कंपनी खोलकर निवेश की गतिविधियां शुरू की। लोगों को 60 से 70 दिन में रकम दोगुनी करने का लालच दिया जाता। शुरुआती निवेश में मुनाफा दिखाने के लिए आरोपी की ओर से एक विशेष तरीका अपनाया जाता। किसी व्यक्ति ने दो लाख रुपये लगाए तो कुछ समय बाद उसे अकाउंट में बढ़ी हुई रकम दिखाई जाती। इससे निवेशक को योजना वास्तविक और फायदे वाली लगती। पर्याप्त रकम जमा होने के बाद आरोपी वेबसाइट का सर्वर डाउन बताता था।  इसके बाद निवेशकों को न तो उनकी मूल रकम वापस मिलती थी और न ही कथित मुनाफा। करीब 22 लोगों के निवेश संबंधी विवरण पुलिस जांच में सामने आए हैं। 

पुलिस को उपलब्ध शिकायतों और दस्तावेजों के आधार पर ठगी की रकम चार करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है। आरोपी महाराष्ट्र का रहने वाला है, जबकि उसका ससुराल कांगड़ा जिले में है। उधर, एसपी विनोद कुमार ने बताया कि मामले में नियमानुसार जांच जारी है।

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डिजिटल साक्ष्य से रहेगी नजर
विजिलेंस मामलों की जांच में अब डिजिटल और मोबाइल फोरेंसिक से लेकर साक्ष्यों के दस्तावेजीकरण और चार्जशीट तैयार करने तक हर स्तर पर गुणवत्ता पर विशेष जोर दिया जाएगा। राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की ओर से जांच अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि किसी मामले की जांच करीब 80 फीसदी पूरी होने पर ड्राफ्ट चार्जशीट तैयार कर अभियोजन या कानूनी राय ली जाए। इससे जांच में रह गई संभावित कमियों को समय रहते दूर किया जा सकेगा। विजिलेंस मामलों की जांच को अधिक पेशेवर और प्रभावी बनाने के लिए 16 और 17 सितंबर को विजिलेंस मुख्यालय शिमला में दो दिवसीय एकीकृत प्रशिक्षण पाठ्यक्रम आयोजित किया गया। एसपी एसआईयू विजिलेंस विरेंद्र कालिया ने भी सत्र को संबोधित किया। डीजीपी एवं राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के प्रमुख अशोक तिवारी डीजीपी ने पेशेवर, साक्ष्य आधारित, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच पर जोर दिया।
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