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कोविड कर्फ्यू ने जंगलों को दी संजीवनी

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मंडी/जोगिंद्रनगर (मंडी)। कोविड की बंदिशों से संक्रमण की चेन टूटने के साथ-साथ जिला मंडी के जंगल भी सुरक्षित बचे हैं। तीन सप्ताह में वनमंडल सुकेत, मंडी, नाचन, करसोग और जोगिंद्रनगर में एक भी आग की घटना नहीं घटी है। इससे पहले ड्राईरन के चलते मार्च और अप्रैल महीने में जिले में पचास से अधिक आग की घटनाएं घट जाती थीं।
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अकेेले जोगिंद्रनगर में ही आठ सौ हेक्टेयर बहुमूल्य वन संपदा को नुकसान पहुंचता था। मई के पहले सप्ताह में कोविड कर्फ्यू के कारण लोग घरों में बंद रहे। इस कारण जंगलों में आग की घटनाएं कम हो गईं। इस बार सूखे के चलते मार्च महीने में ही जंगलों में आग लगनी शुरू हो गई थी। जोगिंद्रनगर उपमंडल में ही मार्च में एक दर्जन से अधिक आग की घटनाओं से वनमंडल के उच्चाधिकारियों की दिक्कतें बढ़ चुकी थीं। अप्रैल महीने में जंगल की आग भयावह रूप धारण कर चुकी थी।
आग की 50 घटनाओं से लाखों रुपये की बहुमूल्य वनसंपदा आग की भेंट चढ़ गई। सैकड़ों जीव जंतु भी आग की चपेट में आए। आग के बढ़ते मामलों को देखकर हेलीकाप्टर से भी आग पर काबू पाने की तैयारी शुरू हुई थी लेकिन अचानक प्रदेश में कोविड कर्फ्यू की बंदिशें वनमंडल के लिए संजीवनी बन गईं। वन मंडलाधिकारी मंडी देवराज कौशल और जोगिंद्रनगर राकेश कटोच ने बताया कि कोविड कर्फ्यू की बंदिशों के चलते लोग घरों में बंद रहे तो जंगल में आग की घटनाएं भी सामने नहीं आईं। तीन सप्ताह में वनों में आग की कोई घटना नहीं घटी है।
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