नेरचौक (मंडी)। आत्मविश्वास और सीखने की लगन हो तो कोई भी चुनौती रास्ता नहीं रोक सकती। खुद को कभी बिजनेस के लिए उपयुक्त न मानने वाली सुनीता ठाकुर ने परिस्थितियों के दबाव में नहीं बल्कि जिम्मेदारी को अवसर में बदलते हुए जगजीत इंडस्ट्रीज को न केवल संभाला बल्कि उसे एक नई पहचान भी दिलाई।
उच्च शिक्षित होने के बावजूद सुनीता ठाकुर ने सरकारी नौकरी के पीछे भागने के बजाय पिता के व्यवसाय को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया। पिता के निधन के बाद जब पूरा कारोबार उनके कंधों पर आ गया, तब उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती खुद पर भरोसा करना था। शुरूआत में उन्हें लगा कि बिजनेस उनकी प्रकृति का हिस्सा नहीं है लेकिन मेहनत, निरंतर सीखने की इच्छा और आत्मविश्वास ने धीरे-धीरे उनकी सोच बदल दी।
आज उद्योग में दो दर्जन से अधिक लोग रोजगार पर हैं। यहां तैयार होने वाले सोफे, बेड और अल्मारियों की भारी मांग है। सुनीता ठाकुर ने अपने संस्थान को केवल मुनाफे तक सीमित नहीं रखा बल्कि इसे रोजगार और विशेष रूप से महिला सशक्तीकरण का माध्यम बनाया। उनके ऑफिस और कार्यस्थल पर महिलाओं की भागीदारी है।
उधर, सुनीता ठाकुर ने बताया कि उनके कार्य में उनके पति व परिवार सबका सहयोग मिला। इसी वजह से वह सब कर पाईं। उन्होंने महिलाओं को संदेश दिया कि किसी भी परिस्थिति से घबराएं नहीं बल्कि डटकर सामना करें।