पधर/बरोट (मंडी)। चौहार घाटी के राजबन में बादल फटने की गंभीर घटना के बाद लापता लोगों को ढूंढने के लिए ग्रामीण पूरी तरह से एकजुट हो गए हैं। रिश्तेदारों और ग्रामीणों ने रेस्क्यू अभियान में अपनी सक्रिय भागीदारी के सर्च ऑपरेशन को तेजी प्रदान की है।
घटनास्थल पर मलबे को हटाना एक चुनौतीपूर्ण कार्य साबित हो रहा है, लेकिन ग्रामीण एक-दूसरे का हौंसला बढ़ाते हुए इस मुश्किल काम में जुटे हुए हैं। प्रशासन भी ग्रामीणों की साहसिकता और सहयोग की सराहना कर रहा है। ग्रामीणों की मदद से सर्च ऑपरेशन को और अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है।
थल्टूखोड, ग्रामण, तेरन, पौंड जैसे गांवों के लोग भी इस अभियान में सक्रिय रूप से शामिल हो गए हैं और प्रशासन को महत्वपूर्ण जानकारी मुहैया करवा रहे हैं। राजबन और आसपास के क्षेत्र में सड़कें अवरुद्ध होने के कारण रेस्क्यू टीमें और प्रशासनिक अधिकारी पैदल ही गांव तक पहुंच रहे हैं। मशीनरी को वहां पहुंचाना मुश्किल हो रहा है। इस कठिन परिस्थिति में ग्रामीण टीमों के लिए एक महत्वपूर्ण सहारा साबित हो रहे हैं।
थल्टूखोड़ पंचायत के पूर्व प्रधान ओमप्रकाश ने बताया कि प्रभावित परिवारों के रिश्तेदार गांव में पहुंच गए हैं और लापता लोगों की तलाश का कार्य जारी है। वहीं, धमच्याण पंचायत के पूर्व प्रधान मंगल सिंह कहते हैं कहा कि आसपास के ग्रामीण अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभा रहे हैं और एनडीआरएफ समेत अन्य टीमों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। उपायुक्त अपूर्व देवगन ने कहा कि स्थानीय लोगों का सहयोग इस तरह की आपात स्थितियों में अत्यंत आवश्यक होता है।
छह किमी पैदल चल पहुंचाया खाना
प्राकृतिक आपदा के बाद बजगान महिला मंडल की 30 महिलाएं पैदल छह किलोमीटर चलकर घटनास्थल पर पहुंची और राहत कार्यों में जुटे लोगों को खाना मुहैया करवाया। महिला मंडल की सदस्य बसंती, शकुंतला, बिमला, रीना और रजनी ने अपने घरों से खाना, रोटियां, सब्जी और बिस्कुट लेकर राहत कार्यों में मदद की।
घर के ताले तुड़वाकर ठहराए प्रभावित
राजबन के साथ लगते गुहरला गांव के निवासी राजेंद्र सिंह ने प्रभावितों को अस्थायी आवास प्रदान करने के लिए अपने घर के ताले तुड़वा दिए हैं। प्रभावित लोग अब राजेंद्र सिंह के घर में रह रहे हैं, जबकि प्रभावित क्षेत्र में कई मकान खाली कराए गए हैं और लोगों को टेंटों या खाली मकानों में शिफ्ट किया गया है।