बाल विकास परियोजना बनी पोषण, संरक्षण और सशक्त बचपन की पहचान
संवाद न्यूज एजेंसी
करसोग (मंडी)। आंगनबाड़ी केंद्र में मिलने वाले स्वादिष्ट एवं पोषणयुक्त आहार के कारण बच्चे अब पहले की तुलना में अधिक स्वस्थ रहने लगे हैं। साथ ही बच्चे खुश भी रह रहे हैं। इससे कुपोषण की स्थिति में कमी आई है। माताएं भी घर पर इन्हीं व्यंजनों को अपनाकर पोषण के प्रति जागरूक हो रही हैं। करसोग क्षेत्र में महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत संचालित बाल विकास परियोजना से बच्चों का बचपन अब अधिक सशक्त और सुरक्षित हो रहा है।
करसोग में कुल 288 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। इनमें 266 आंगनबाड़ी केंद्र और 22 मिनी आंगनबाड़ी केंद्र हैं। इन केंद्रों के माध्यम से 0 से 6 वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती महिलाओं तथा धात्री माताओं को पोषाहार कार्यक्रम के अंतर्गत लाभ प्रदान किया जा रहा है। वर्तमान में इन केंद्रों में 0 से 6 माह तक के 456 बच्चे, 6 माह से 3 वर्ष तक के 2,554 बच्चे और 3 से 6 वर्ष तक के 3,324 बच्चे, 872 माताएं संतुलित एवं पौष्टिक आहार के साथ-साथ स्वास्थ्य परामर्श, टीकाकरण, वजन और स्वास्थ्य परीक्षण जैसी सेवाओं का लाभ ले रहे हैं। केंद्रों में सप्ताह में छह दिन बदल-बदल कर विभिन्न प्रकार के व्यंजन नौनिहालों को परोसे जाते हैं। इनमें पुलाव, मीठा दलिया, मीठे चावल, नमकीन दलिया, हरी पत्तेदार सब्जियां सेवियां, राजमाह चावल, चने, न्यूट्रीमिक्स और बिस्कुट आदि शामिल हैं। ग्रामीण महिला दीपा कुमारी ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्र में मिलने वाले पोषणयुक्त पोषाहार के कारण उनका बच्चा अब पहले की तुलना में अधिक स्वस्थ और खुश रहता है। उसे मीठा दलिया और पुलाव बहुत पसंद है। आंगनबाड़ी केंद्र न्यारा की कार्यकर्ता कुसुम का कहना हैं कि केंद्र में प्रतिदिन अलग रेसिपी से बच्चों और महिलाओं को पौष्टिक खाना परोसा जाता है। यह बदलाव आने वाली पीढ़ियों को भी स्वस्थ बनाएगा।
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आंगनबाड़ी केंद्र न केवल पोषण का माध्यम बन रहे हैं, बल्कि शिक्षा, जागरूकता और सामाजिक बदलाव की नींव भी रख रहे हैं। हमारा उद्देश्य है कि क्षेत्र का हर बच्चा और हर मां स्वास्थ्य, पोषण और देखभाल की सुविधाओं तक पहुंचे।
-विपाशा भाटिया, सीडीपीओ करसोग
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