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चौहारघाटी के बड़ादेव हुरंग नारायण मेले के लिए रवाना

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चौहारघाटी के बड़ा देव हुरंग नारायण ढोल नगाड़ों के साथ लाव लश्कर से महाशिवरात्रि के लिए कारदारों ? - फोटो : Mandi
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मंडी। चौहारघाटी के बड़ादेव हुरंग नारायण अपने देव स्थल हुरंग से विधि विधान से सोमवार को महाशिवरात्रि महोत्सव मंडी के लिए पैदल रवाना हो गए हैं। देवता रास्ते में एक सप्ताह तक विभिन्न स्थानों पर रात्रि ठहराव करेंगे।
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एक मार्च को देवता सैकड़ों देवलुओं के साथ मंडी महाशिवरात्रि में शिरकत करने से पहले राजदेवता माधोराय मंदिर में भव्य मिलन करेंगे। देवता का सोमवार को भटेड़ गांव में पहला रात्रि ठहराव रहेगा। उसके बाद देवता का 22 फरवरी को पधर, 23-24 नोहली, 25 को नारला, 26 सिंह और 27 को पाली में पेखरू गहरी के साथ देवता मिलन करेंगे।
28 को देवता का टांडू में और एक मार्च को देवता का चौहारघाटी के बजीर देव पशाकोट, देव गहरी, पेखरू गहरी और घड़ौणी नारायण से मैगल के पास भव्य मिलन होगा। इसके पश्चात घाटी के सभी देवता राजदेवता माधो राय मंदिर में मिलन कर महाशिवरात्रि का आगाज करेंगे। देव हुरंग नारायण का रात्रि ठहराव एक मार्च से 8 मार्च तक त्रिलोकी नाथ मंदिर पुरानी मंडी में रहेगा।
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महाशिवरात्रि में अहम स्थान
देवता का प्राचीन समय से महाशिवरात्रि मेला मंडी में अहम स्थान रहता है। चौहारघाटी के बीचोबीच स्थित हुरंग गांव में देवता का वास है। अब देवता के मंदिर तक गाड़ी पहुंचती है। देव हुरंग नारायण को बारिश का देवता भी माना गया है। मौसम संबंधी सवाल लेकर लोग उनके दर पहुंचते हैं।
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देव परिसर में नशीले पदार्थों पर प्रतिबंध
देवता के परिसर तथा गांव में कोई भी व्यक्ति नशीले पदार्थ लेकर प्रवेश नहीं करते हैं। जंगल में एक बड़े वृक्ष के नीचे देवता का स्थान माना गया है।
जहां आम जन के लिए जाना एक तरह से वर्जित है। गांव में देवता का भंडार है और वहीं पर देव स्थापित किए गए हैं। देवता के पूर्व गूर राम लाल ने बताया कि देवता का रथ महाशिवरात्रि महोत्सव के लिए अपने मूूल स्थान से सोमवार शाम को रवाना हो गए हैं।
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