मंडी। वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश मंडी की अदालत ने भारतीय स्टेट बैंक की ओर से दायर वसूली वाद को कमर्शियल कोर्ट में स्थानांतरित करने के आदेश दिए हैं। यह मामला करीब 4.20 लाख रुपये की बकाया राशि की वसूली से जुड़ा है, जिसे अब जिला न्यायाधीश मंडी की अदालत में सुना जाएगा।
मामले के तथ्यों के अनुसार भारतीय स्टेट बैंक ने मुस्कान सेल्फ हेल्प ग्रुप एवं उसके सदस्यों के खिलाफ यह वाद दायर किया था। बैंक का आरोप है कि वर्ष 2011 में समूह के सदस्यों ने दो लाख रुपये का टर्म लोन लिया था, लेकिन निर्धारित शर्तों के अनुसार ऋण की अदायगी नहीं की गई। कई बार नोटिस देने के बावजूद ऋण खाते को नियमित नहीं किया गया, जिसके बाद बैंक को अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि यह विवाद बैंकिंग लेन-देन से संबंधित है, जिसे कमर्शियल विवाद की श्रेणी में रखा जाता है। अदालत ने कमर्शियल कोर्ट अधिनियम 2015 के प्रावधानों और हाल ही में हिमाचल प्रदेश सरकार की ओर से जारी अधिसूचना (अगस्त 2025) का हवाला देते हुए कहा कि ऐसे मामलों की सुनवाई अब विशेष रूप से गठित कमर्शियल कोर्ट में ही की जानी चाहिए।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि चूंकि वाद की राशि तीन लाख रुपये से अधिक है, इसलिए इसे कमर्शियल कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में स्थानांतरित करना आवश्यक है। इसी आधार पर वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश ने पूरा केस रिकॉर्ड जिला न्यायाधीश मंडी को भेजने के निर्देश दिए हैं।
इस आदेश के साथ अब इस पुराने ऋण विवाद की सुनवाई नए सिरे से कमर्शियल कोर्ट में होगी, जहां मामले का निपटारा कानून के निर्धारित प्रावधानों के अनुसार किया जाएगा।