स्कूल प्रशासन ने झाड़ा पल्ला, एसडीएम को भेजा पत्र
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। जिला स्तरीय बालीचौकी मेला इस बार विवादों और असमंजस की स्थिति के बीच घिरता नजर आ रहा है। 23 से 27 मई तक प्रस्तावित इस मेले को लेकर राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बालीचौकी प्रशासन ने किसी भी प्रकार की जिम्मेदारी लेने से स्पष्ट इन्कार कर दिया है। स्कूल के कार्यवाहक प्रभारी ने रिटर्निंग ऑफिसर-सह-उपमंडल अधिकारी बालीचौकी को भेजे पत्र में कहा है कि पंचायत समिति और जिला परिषद चुनावों से संबंधित गतिविधियों के चलते विद्यालय प्रशासन मेले के आयोजन के लिए जिम्मेदार नहीं होगा।
पत्र में उल्लेख किया गया है कि 29 अप्रैल को एसडीएम कार्यालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार मतदान दलों के पूर्वाभ्यास, स्ट्रांग रूम की स्थापना तथा मतगणना की तैयारियों के लिए स्कूल के विज्ञान ब्लॉक का उपयोग किया जा रहा है। ऐसे में विद्यालय परिसर पहले से ही चुनावी प्रक्रियाओं के लिए अधिग्रहित है।
जिला स्तरीय बालीचौकी मेला पिछले कई वर्षों से इसी विद्यालय परिसर में आयोजित होता रहा है। हालांकि उच्च न्यायालय के आदेशों के अनुसार स्कूल परिसर में मेले या अन्य आयोजनों के लिए पूर्व अनुमति आवश्यक होती है। हर वर्ष अनुमति मिलने के बाद ही दोपहर तीन बजे से रात 10 बजे तक मेले का आयोजन किया जाता रहा है। इस बार पंचायत समिति का गठन न होने के कारण मेले के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी एसडीएम बालीचौकी के पास है और मेला उनके नेतृत्व में आयोजित किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार लगभग दो बीघा भूमि स्थानीय आराध्य देवता के नाम पर है, जबकि शेष भूमि शिक्षा विभाग के अधीन आती है।
स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) के प्रधान कौर सिंह ने बताया कि हर वर्ष मेले के लिए उच्च न्यायालय से अनुमति ली जाती थी, लेकिन इस बार अभी तक कोई अनुमति पत्र प्राप्त नहीं हुआ है। इसी कारण मेले के आयोजन को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। वहीं, एसडीएम बालीचौकी बिचित्र सिंह ने स्पष्ट किया कि स्कूल परिसर में स्ट्रांग रूम के पास फेंसिंग की गई है और किसी भी सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन नहीं किया जा रहा है। उनके अनुसार देवता की भूमि पर ही मेला आयोजित हो रहा है और श्रद्धालु केवल दर्शन कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उच्च न्यायालय की अनुमति की आवश्यकता केवल तभी होती है जब स्कूल परिसर का उपयोग किया जाए।