मंडी जिले के गोहर क्षेत्र की बेटी अंजलि ठाकुर ने अंतरराष्ट्रीय बोशिया प्रतियोगिता में इतिहास रच दिया है। चेक गणराज्य के पिलसेन में आयोजित पिलसेन-2026 वर्ल्ड बोशिया चैलेंजर प्रतियोगिता में अंजलि ने बीसी-3 पेयर स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर देश और प्रदेश का नाम रोशन किया। इस स्पर्धा में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को पहली बार स्वर्ण पदक मिला है। अंजलि की इस उपलब्धि से भारतीय बोशिया खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों और खेल प्रेमियों में खुशी का माहौल है।
भारतीय टीम ने दिखाया शानदार तालमेल
अंजलि ने भारतीय टीम के साथियों प्रियंका, अजेया राज और संदीप के साथ शानदार तालमेल दिखाया। प्रतियोगिता के दौरान टीम ने सटीक निशाने, बेहतर रणनीति और आत्मविश्वास के साथ खेलते हुए कड़े मुकाबलों में जीत हासिल की।
टीम के प्रदर्शन में खिलाड़ियों के बीच समन्वय और लगातार अभ्यास की झलक दिखाई दी। स्वर्ण पदक जीतने के बाद भारतीय दल की इस उपलब्धि को बोशिया खेल के लिए महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।
जनैणी गांव में खुशी की लहर
अंजलि ठाकुर मंडी जिले के गोहर उपमंडल की मौवीसेरी पंचायत के जनैणी गांव की रहने वाली हैं। उनकी जीत की खबर जैसे ही गांव और परिजनों तक पहुंची, खुशी की लहर दौड़ गई। अंजलि फिलहाल अपनी टीम के साथ पिलसेन में हैं।
परिजनों ने फोन पर अंजलि को जीत की बधाई दी और भविष्य की प्रतियोगिताओं के लिए शुभकामनाएं दीं। परिवार का कहना है कि अंजलि ने अपनी मेहनत, लगन और मजबूत हौसले से यह मुकाम हासिल किया है।
क्या है बोशिया खेल?
बोशिया एक इनडोर खेल है, जिसे गंभीर शारीरिक अक्षमता वाले खिलाड़ियों के लिए विकसित किया गया है। यह पैरालंपिक खेलों का हिस्सा है। इस खेल में सफेद रंग की गेंद को ‘जैक’ कहा जाता है। खिलाड़ी लाल और नीली गेंदों को जैक के अधिक से अधिक करीब पहुंचाने का प्रयास करते हैं।
सभी गेंदें खेले जाने के बाद जैक के सबसे करीब गेंद रखने वाले खिलाड़ी या टीम को अंक मिलते हैं। कई बार विजेता का फैसला गेंदों की दूरी मिलीमीटर तक मापकर किया जाता है। खिलाड़ी आमतौर पर व्हीलचेयर पर बैठकर इस खेल में हिस्सा लेते हैं।