सुंदरनगर (मंडी)। वन मंडल सुकेत के तहत आने वाले किसान अब मशरूम के साथ हरड़, आंवला और रीठा के औषधीय पौधों से अपनी आर्थिकी को मजबूत करेंगे। वन मंडल सुकेत की ओर से वन परिक्षेत्र सरकाघाट के तहत वन ग्रामीण विकास समिति कठोगन और कांगू में इसके लिए तीन साइट विकसित की गई हैं। जिसमें 2281 औषधीय पौधे लगाए गए हैं। सुकेत वन मंडल के जायका वानिकी परियोजना के एसएमएस डॉ. विजय कुमार ने बताया कि साल 2023 में इन साइट्स पर औषधीय पौधों को लगाने के लिए ग्रामीण वन विकास समितियों के माध्यम से कलमी आंवला, हरड़ और रीठा के पौधे लगाए गए हैं। ये पौधे किसानों को परियोजना के माध्यम से निशुल्क उपलब्ध करवाए गए हैं। पौधे बागवानी विश्वविद्यालय नेरी से मंगवाए गए थे। कांगू वन परिक्षेत्र की समिति बह में कुल 1300 कलमी औषधीय पौधे लगाए। ग्रामीण वन विकास समिति गमोहू में 361 कलमी औषधीय पौधे लगाए गए। सरकाघाट की कठोगन समिति के तहत 620 कलमी पौधे लगाए गए। आज बाजार में जिस तरह से आयुर्वेद के उत्पादन में बढ़ोतरी हुई, उसके आधार पर इन औषधीय पौधों से निकली फसलों की मांग बढ़ रही है। 2026 तक इन तीनों साइट्स से आंवला ,रीठा और हरड़ के पौधे फल देना शुरू कर देंगे।
सुकेत वन मंडल के वन परिक्षेत्र कांगू के बह, गमोहू के साथ सरकाघाट के कठोगन में 2281 कलमी औषधीय पौधे वन विकास समितियों ने जायका परियोजना के माध्यम से लगाए हैं। जो आने वाले समय में फल देना शुरू करेंगे । अब सुकेत वन मंडल की ग्रामीण वन विकास समितियों के जरिये आयुर्वेदिक कंपनियों को आंवला और हरड़ च्यवनप्राश और त्रिफला बनाने के लिए कच्चा माल उपलब्ध करवाएंगे।
-राकेश कटोच, वन मंडलाधिकारी सुकेत