गोहर (मंडी)। छह दशक के लंबे अंतराल के बाद कमरुनाग धाम पहुंचे देव चुंजवाला अब भव्य मिलन और पवित्र शाही स्नान के पश्चात अपने निवास कोठी शालागाड़ लौट आए हैं। 15 अक्तूबर को शुरू हुई यह दिव्य यात्रा न केवल धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण रही बल्कि लोक आस्था और सांस्कृतिक एकता का एक दुर्लभ उदाहरण भी बनी।
देवता चुंजवाला अपने पारंपरिक सात हारों के साथ भक्ति, श्रद्धा और परंपरा की अनुपम छवि प्रस्तुत करते हुए कमरुनाग धाम पहुंचे, जहां देव कमरुनाग के साथ उनका भव्य मिलन हुआ। कमरुनाग धाम पहुंचने पर स्थानीय देव समाज, गूरों, कारकूनों और हजारों श्रद्धालुओं ने देवताओं की अगवानी की। इस ऐतिहासिक क्षण ने मानो समय को पीछे छोड़ दिया और कमरु घाटी एक बार फिर देवमयी हो उठी। कमरु नाग झील के पवित्र जल में देवता चुंजवाला द्वारा किया गया शाही स्नान आध्यात्मिक ऊर्जा और धार्मिक आस्था का केंद्र बिंदु बना।
इससे पहले वर्ष 1966 में देवता चुंजवाला कमरु नाग धाम पहुंचे थे और इस बार की यात्रा को पुनः एक ऐतिहासिक मिलन के रूप में देखा गया। इस आयोजन के सफल संपन्न होने पर समस्त देव समाज, ग्रामीण जनता और गूर परंपरा ने मिलकर आभार और उल्लास व्यक्त किया। देवता चुंजवाला की वापसी ने न केवल धार्मिक उत्सव को पूर्ण किया बल्कि समस्त क्षेत्र में अध्यात्म और भक्ति की एक नई लहर भी दौड़ा दी। बड़ा देव के गूर देवी सिंह ने देव चुंजवाला के वापस लौटने की पुष्टि की है।