मुख्यमंत्री के आदेश के एसडीएम ने लिया पशुपालकों से फीडबैक
चक्कर मिल्क प्लांट की क्षमता कम होने से रोटेशन में कट लगाने की बात आई सामने
संवाद न्यूज एजेंसी
रिवालसर (मंडी)। चक्कर मिल्क प्लांट प्रबंधन की ओर से महीने में पांच से छह दिन दुग्ध सोसायटियों से दूध नहीं लेने के मामले में मुख्यमंत्री के आदेश के बाद प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है। बुधवार को एसडीएम बल्ह स्मृतिका नेगी ने डहणू में पशुपालकों, दुग्ध सोसायटी सदस्यों और चक्कर मिल्क प्लांट के अधिकारियों के साथ संयुक्त बैठक कर पूरे मामले पर फीडबैक लिया। बैठक के बाद विभागीय रिपोर्ट तैयार कर मुख्यमंत्री को भेजी जाएगी।
बीते 26 सितंबर को कंसा चौक में पशुपालकों ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के समक्ष यह मुद्दा उठाया था। पशुपालकों ने बताया था कि महीने में कई दिन दूध नहीं लिए जाने के कारण उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। डहणू, सिध्यानी और बर्सवान दुग्ध सोसायटियों की महिलाओं ने बैठक में बताया कि उन्होंने बैंकों से ऋण लेकर गायें खरीदी हैं। दूध बेचकर परिवार का खर्च चलाने के साथ-साथ बैंक ऋण की किस्तें भी चुकाई जाती हैं। ऐसे में कई दिनों तक दूध नहीं लिए जाने से उन्हें आर्थिक परेशानी होती है और दूध खराब होने की स्थिति भी पैदा हो जाती है। महिलाओं ने दूध का भुगतान समय पर नहीं मिलने की शिकायत भी प्रशासन के समक्ष रखी। उधर, प्लांट अधिकारियों ने बताया कि प्लांट की क्षमता कम होने के कारण दूध खरीद में रोटेशन के आधार पर कट लगाया जाता है। इस पर एसडीएम ने दूध का भुगतान समय पर करने और दूध खरीद में छह दिन के कट को बंद करने के निर्देश दिए। बैठक में पंचायत प्रधान देवेंद्र ठाकुर सहित दुग्ध सोसायटी सदस्य, पशुपालक और विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।