मंडी। कांगणीधार की पहाड़ी को काटकर बनाया जा रहा शिवधाम निर्माण के पहले चरण को भी पार नहीं कर सका है। ज्योतिर्लिंग प्रतिकृतियों का अधूरा ढांचा खड़ा है। कहीं कंक्रीट तो कहीं सिर्फ नींव और कई जगह मशीनें खड़ी हैं।
पूर्व भाजपा सरकार में छह साल पहले जिस परियोजना को हिमाचल के धार्मिक पर्यटन का चेहरा बदलने वाला बताया गया था, वह आज भी पहले चरण से आगे नहीं बढ़ पाई है। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर के ड्रीम प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू हुआ शिवधाम सत्ता परिवर्तन के बाद रफ्तार खो बैठा। अब दोबारा निर्माण शुरू होने के बावजूद काम रफ्तार नहीं पकड़ पाया है। पहले चरण में बनने वाली 12 ज्योतिर्लिंग प्रतिकृतियों में से महज पांच ही तैयार हो पाई हैं, तीन पर काम चल रहा है। चार की शुरुआत तक नहीं हो सकी। 150 करोड़ रुपये की इस परियोजना में अब तक सीमित काम ही जमीन पर नजर आता है।
प्रथम चरण का बचा निर्माण शुरू
बेशक साढ़े तीन वर्ष बाद निर्माण शुरू हुआ है लेकिन योजना के द्वितीय और तृतीय चरण को पूरा करने की शासन की प्राथमिकता सवालों में है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू शिवधाम के निर्माण को हर हाल में पूरा करने दावा कर चुके हैं लेकिन इस वर्ष के अंत तक प्रथम चरण का कार्य पूरा होने पर संशय बरकरार है। ऐसे में मौजूदा कांग्रेस सरकार में शिवधाम का निर्माण पूरा किए जाने की प्राथमिकताओं पर बड़े सवाल उठ रहे हैं। 150 करोड़ रुपये की इस परियोजना की मौजूदा तस्वीर यह है कि प्रथम चरण के 50 करोड़ में से अभी 15 से 20 करोड़ ही खर्च हो सके हैं। साढ़े तीन साल के अरसे के बाद बीते वर्ष अगस्त में सुंदरनगर की फर्म ने इस निर्माण को आगे बढ़ाया है। फर्म को टेंडर जून 2025 में आवंटित हो गया था। दो माह बाद कंपनी ने कार्य शुरू किया है। इस वर्ष के अंत तक 12 ज्योतिर्लिंग मंदिरों की प्रतिकृतियों का निर्माण पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है।
टेंडर और विवादों में उलझी रही रफ्तार
परियोजना की सबसे बड़ी बाधा निर्माण नहीं, बल्कि प्रक्रियात्मक उलझनें और सत्ता बदलाव रही हैं। महाराष्ट्र की कंपनी ने शुरुआती ढांचे तैयार किए लेकिन अनियमितताओं के आरोपों के बाद सितंबर 2022 से काम ठप हो गया। 2024 में दोबारा टेंडर प्रक्रिया शुरू हुई लेकिन कंपनियों के विवाद और दस्तावेजी खामियों के चलते इसे अदालत के आदेश पर रद्द करना पड़ा। अंततः जून 2025 में सुंदरनगर की फर्म को करीब 25 करोड़ में काम आवंटित किया गया, जिसके बाद निर्माण फिर से शुरू हो पाया।
क्या है शिवधाम का विजन
शिवधाम को धार्मिक पर्यटन के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है। इसमें कैलाश द्वार, गणेश प्रतिमा, 12 ज्योतिर्लिंगों का प्रतिकृति मंदिर, गंगा कुंड, मानसरोवर कुंड, मोक्ष पथ, शिव स्मृति म्यूजियम और विशाल शिवलिंग स्थापित किए जाने हैं।
प्रथम चरण में 12 ज्योतिर्लिंगों की प्रतिकृतियों का निर्माण किया जा रहा है। आठ प्रतिकृतियां लगभग तैयार हैं और शेष कार्य इस वर्ष के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य है।
रितेश पटियाल, सहायक जिला पर्यटन अधिकारी, मंडी