संवाद न्यूज एजेंसी
सुंदरनगर (मंडी)। मां की गोद में एक बच्चा, कंधे पर दूसरे का बस्ता और रोजाना चार किलोमीटर का पैदल सफर... संघर्ष की इसी राह पर शुरू हुई पढ़ाई आज एक बड़ी उपलब्धि तक पहुंच गई है।
सुंदरनगर के पलोहटा निवासी प्रवीण ठाकुर ने आईआईटी दिल्ली से डॉक्टरेट की उपाधि हासिल की है। उन्होंने अपनी इस उपलब्धि को माता-पिता के त्याग, संघर्ष और संस्कारों को समर्पित किया है।
प्रवीण ठाकुर ने पहली से पांचवीं कक्षा तक सरस्वती विद्या मंदिर महादेव में शिक्षा ग्रहण की। इसके बाद उनका चयन जवाहर नवोदय विद्यालय पंडोह के लिए हुआ, जहां उन्होंने सात वर्षों तक पढ़ाई की। उच्च शिक्षा के लिए उनका सफर एनआईटी हमीरपुर से होते हुए आईआईटी खड़गपुर और फिर आईआईटी दिल्ली तक पहुंचा। प्रवीण का कहना है कि उनकी सफलता के पीछे माता-पिता का संघर्ष सबसे बड़ा आधार रहा है। उनके पिता नंद लाल शिक्षक होने के साथ-साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक भी रहे हैं।
पिता से उन्हें सनातन संस्कृति और राष्ट्रभक्ति के संस्कार मिले। वहीं, उनकी माता नर्बदा देवी ने बच्चों की शिक्षा के लिए कठिन परिस्थितियों में भी संघर्ष का रास्ता नहीं छोड़ा।
प्रवीण बताते हैं कि जब उनके पिता की तैनाती करसोग के बेलरधार में थी, तब उनकी मां रोजाना करीब चार किलोमीटर पैदल चलकर बच्चों को सरस्वती विद्या मंदिर महादेव पहुंचाती थीं।
वह एक बच्चे को गोद में उठाती थीं और दूसरे का बस्ता कंधे पर लेकर पैदल स्कूल तक जाती थीं। मां के इसी संघर्ष ने बच्चों की शिक्षा की मजबूत नींव रखी।
प्रवीण कहते हैं कि यह डिग्री भले ही उनके नाम है लेकिन इसकी कहानी उनके माता-पिता के संघर्ष से शुरू होती है। उनके अनुसार आज मिली यह उपलब्धि माता-पिता के त्याग, मेहनत और संस्कारों का परिणाम है।