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जल वितरकों के लिए बने ठोस नीति

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जल वितरकों के लिए बने ठोस नीति
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मंडी। जल वितरक यूनियन संबंधित सीटू की बैठक में जल वितरकों के लिए ठोस नीति नहीं बनाने पर रोष जताया गया। बैठक बुधवार को जिला प्रधान श्याम लाल की अध्यक्षता में कामरेड तारा चंद भवन में हुई। श्याम लाल ने कहा कि आईपीएच विभाग द्वारा वर्ष 2005 में जल वितरकों की नियुक्ति की गई थी, लेकिन विभाग ने इन जल वितरकों को विभाग के बजाए पंचायतों के माध्यम से कार्य सौंपा है। जिसके कारण इनको नियमित करने एवं न्यूनतम वेतन अदा करने बारे कोई पॉलिसी नहीं बनाई है।
बैठक में निर्णय लिया गया कि यूनियन एक प्रतिनिधिमंडल नवंबर माह के प्रथम सप्ताह में विभाग की मंत्री और इंजीनियर इन चीफ से शिमला में मिलेगा। इस मौके पर जल वितरकों को न्यूनतम 5100 रुपये मासिक वेतन देने, हर माह वेतन अदा करने, जल वितरकों को नियुक्ति पत्र जारी करने और उनकी हाजिरी रजिस्टर पर दर्ज करने तथा काम के घंटे निर्धारित करने, पिछले एक वर्ष से लंबित मानदेय की अदायगी शीघ्र करने, जल वितरकों को दिहाड़ी एवं रेगुलर करने केलिए नीति बनाने की मांग की जाएगी
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उन्होंने बताया कि वर्तमान में सरकार उन्हें मात्र 1350 रुपये मासिक मानदेय दे रही है, लेकिन उसकी अदायगी भी हर माह नहीं की जा रही है। बैठक में निर्णय लिया गया कि यदि सरकार ने नवंबर माह में इन मांगों बारे कोई फैसला नहीं लिया तो पांच दिसंबर को एक दिन की हड़ताल की जाएगी। सीटू के जिला प्रधान भूपेंद्र सिंह ने कहा कि केंद्र एवं राज्य सरकारें अब सभी प्रकार की नौकरियां अंशकालिक एवं ठेके पर आधारित दे रही है। जिनमें बहुत कम वेतन एवं मानदेय दिया जा रहा है। बैठक में यूनियन के सदस्य जय राम, संतोष कुमार, पुष्पराज, धनी राम, पवन कुमार, रफी, अनिल, कर्म चंद, प्रेम सिंह, देवेंद्र कुमार, राजपाल, अरुण कुमार, चमन लाल सहित अन्य सदस्य मौजूद थे।

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