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टमाटर के प्रति क्रेट पर सौ रुपये घाटा

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नेरचौक/चैलचौक (मंडी)। टमाटर के उचित दाम न मिलने से प्रदेश के किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। उत्पादन लागत के आधे रेट से भी कम दाम किसानों को मिल रहे हैं। अच्छी आमदनी की उम्मीदों को लेकर बल्हघाटी के अलावा जिले के अन्य क्षेत्रों के किसानों ने टमाटर की पैदावार को तरजीह दी थी। टमाटर की बंपर फसल के साथ दाम सही न मिलने से अब किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया है।
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टमाटर उत्पादक किसानों की आर्थिक स्थिति पतली हो गई है। कमरतोड़ मेहनत के साथ ही दवाईयों और बीज पर खर्च की गई रकम भी वसूल नहीं हो पा रही है। 22 किलोग्राम के एक क्रेट के दाम 40 से 50 रुपये तक मिल रहे हैं। एक क्रेट टमाटर उत्पादन का खर्चा 150 रुपये तक है।
बल्हघाटी की दर्जनों पंचायतों के अलावा चैलचौक के कोट, नौण, पठाण और चलाहर गांवों में किसानाें ने उपजाऊ भूमि पर टमाटर की फसल उगा रखी है। किसान प्रेम सिंह, सोहन लाल, नागणु राम, गुलजारी लाल और लोदी राम का कहना है कि टमाटर के बीज, खाद और फसल को कीटनाशकों तथा बीमारियों की देखभाल के लिए किए खर्चे का पैसा भी किसान हासिल नहीं कर पाए। किसानों ने सरकार से प्रदेश में टमाटर के लिए प्रोसेस़िग यूनिट लगाने सहित समर्थन मूल्य तय करने की मांग की है। प्रदेश में 60 हजार किसान परिवार 1.60 लाख बीघा भूमि पर टमाटर की पैदावार करते हैं। सोलन जिला टमाटर उत्पादन में सबसे आगे है। इसके साथ ही बल्हघाटी में सबसे ज्यादा टमाटर की पैदावार होती है।
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एमएफसी चैलचौक के मालिक एवं थोक व्यापारी महेंद्र पाल ने कहा कि प्रदेश और बाहरी राज्यों की मंडियों में टमाटर की मांग कम है। पंजाब में अभी टमाटर का सीजन बंद नहीं हुआ है। इस कारण टमाटर के दाम कम मिल रहे हैं। इससे व्यापारी वर्ग को गाड़ियों का किराया पूरा करने में परेशानी हो रही है। कृषि विकास अधिकारी रमेश सैणी ने कहा कि किसानों को मेहनत के पैसे भी नसीब न होना चिंता का विषय है।
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