मंडी। बल्ब, बैटरी, पेंट, ड्रम जैसे खतरनाक कचरे को गीले और सूखे कूड़े से अलग रखने की व्यवस्था बनाई जाए। साथ ही शहरी स्थानीय निकायों में वार्ड स्तर पर समितियां बनाई जाएं और घर-घर जाकर लोगों को गीला और सूखा कचरा अलग-अलग देने के लिए जागरूक किया जाए। यह आदेश राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण की ठोस कचरा प्रबंधन नियम लागू करने संबंधी राज्य समिति की अध्यक्ष एवं हिमाचल प्रदेश की पूर्व मुख्य सचिव राजवंत संधू ने अधिकारियों को दिए। वह वीरवार को डीआरडीए सभागार में मंडी जिला के शहरी स्थानीय निकायों तथा विभिन्न विकास खंडों की ओर से ठोस कचरा प्रबंधन नियम-2016 की अनुपालना को लेकर आयोजित बैठक की अध्यक्षता कर रही थीं। उन्होंने कहा कि लोगों को जैविक और अजैविक कचरे का अंतर बताया जाए। घरों से हफ्ते में 6 दिन गीला कचरा और एक दिन सूखा कचरा उठाने की व्यवस्था बनाई जाए। उन्होंने इस अवसर पर उपस्थित खंड विकास अधिकारियों और शहरी निकायों के अधिकारियों से कचरा प्रबंधन के विषय में पूर्ण जानकारी प्राप्त की और जरूरी सुझाव दिए। इस मौके उपायुक्त ऋग्वेद ठाकुर ने समिति की अध्यक्ष का स्वागत करते हुए विश्वास दिलाया कि मंडी जिला में ठोस कूड़ा कचरा प्रबंधन को लेकर सभी नियमों एवं आदेशों का पूर्ण पालन सुनिश्चित बनाया जाएगा। बैठक में सभी एसडीएम, विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, खंड विकास अधिकारी एवं शहरी निकायों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
स्थानीय स्तर पर करें गीले कचरे का प्रबंधन
राजवंत संधू ने सभी शहरी निकायों को स्थानीय स्तर पर गीले कचरे का प्रबंधन करने के निर्देश दिए। कहा कि शहरी निकाय अपना कचरा बाहर न भेजें। अपने यहां जमीन देख कर छोटे गड्ढे बनाएं, वहीं गीले कचरे का निपटान करें। गोशालाओं के परिसर में भी गढ्ढे बना कर गीला कचरा और गोबर डाल कर कंपोस्ट बनाई जा सकती है, उस दिशा में काम करें। उन्होंने कहा कि यह भी सुनिश्चित बनाया जाए कि ठोस एवं तरल कचरा नदियों, नालों में न जाए।
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