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मंडी में गायनी वार्ड में जगह नहीं और सुंदरनगर में खाली पड़े हैं बेड

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- फोटो : अमर उजाला
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सुंदरनगर (मंडी)।एक ओर मंडी स्थित क्षेत्रीय अस्पताल में प्रसूता और नवजात बच्चों के लिए बेड उपलब्ध नहीं हैं, उन्हें ठंड में जमीन पर कंबल बिछा कर रहने को मजबूर होना पड़ रहा है वहीं, सुंदरनगर स्थित नागरिक अस्पताल में एक माह से गायनी विशेषज्ञ न होने के कारण ओपीडी और वार्ड में बिस्तर खाली पड़े हैं। दूरदराज के क्षेत्रों से रोजाना काफी संख्या में महिलाएं यहां पर डिलीवरी के लिए आ रही हैं लेकिन, उन्हें बिना जांच के ही मंडी जाने के लिए कहा जा रहा है। जिसके कारण महिलाओं और उनके परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन, स्वास्थ्य महकमा यह सब देखते हुए मूकदर्शक बना हुआ है। सुंदरनगर के नागरिक अस्पताल में तैनात महिला रोग विशेषज्ञ और सर्जन दंपति का गत अक्तूबर माह में नेरचौक मेडिकल कालेज के लिए यहां से तबादला हो गया था लेकिन, बीच में विधानसभा चुनाव का शंखनाद होने से स्वास्थ्य विभाग ने दंपति का दबाव में एक माह के लिए अस्पताल में डेपुटेशन कर दिया। लेकिन, जैसे ही विधानसभा चुनाव के लिए 9 नवंबर को मतदान हुआ, इन चिकित्सकों को मंडी वापस बुला लिया गया। जिसके बाद एक माह से अधिक समय हो गया है, सुंदरनगर अस्पताल में न तो कोई डिलीवरी हो रही है और न ही सर्जरी। सुंदरनगर अस्पताल में सालाना 2500 के करीब प्रसव होते हैं। एक जनवरी से अक्तूबर माह के अंत तक यहां पर 2285 महिलाओं की सर्जरी और नार्मल डिलीवरी हुई है। लेकिन, उसके बाद एक माह से अधिक समय से यहां पर कोई डिलीवरी नहीं हो रही है। जिस कारण मंडी स्थित जोनल अस्पताल में दबाव बढ़ा है। विभागीय जानकारी के अनुसार हर रोज एक दर्जन से अधिक महिलाओं को डिलीवरी के लिए मंडी मौखिक रूप से रेफर किया जा रहा है।
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मंजूरी के चार साल बाद भी शुरू नहीं हुआ मातृ-शिशु अस्पताल
सुंदरनगर स्थित नागरिक अस्पताल में प्रसूता के लिए आने वाली महिलाओं को बढ़ती तादाद को देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने यहां के लिए 50 बिस्तर वाला मातृ-शिशु अस्पताल मंजूर किया था। जिसके लिए स्वास्थ्य विभाग को 12 करोड़ का बजट भी चार साल से आया हुआ है। लेकिन, वर्तमान सरकार के समय में इसे स्थापित करने के लिए कोई गंभीर प्रयास नहीं किए गए। जब चुनाव सिर पर आ गए तो इसका राजनीतिक फायदा लेने के लिए ऑनलाइन शिलान्यास किया गया। अगर यहां पर समय रहते मातृ शिशु अस्पताल आरंभ हो जाता तो उसके लिए अलग से स्टॉफ उपलब्ध होना था। जिस कारण मंडी जोनल अस्पताल पर बढ़ा दबाव कम हो जाता। वहीं, गर्भवती महिलाओं को भी एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल धक्के नहीं खाने पड़ते।

बदतर हालात के लिए कांग्रेस सरकार दोषी
भाजपा के संगठनात्मक जिला सुंदरनगर के अध्यक्ष राकेश जम्वाल का कहना है कि सुंदरनगर अस्पताल में एक माह से अधिक समय से गर्भवती महिलाओं को सुविधा नहीं मिल रही हैं। जिसके कारण भी मंडी स्थित जोनल अस्पताल में दबाव बढ़ा है। जिले से स्वास्थ्य मंत्री होते हुए भी यहां पर हालात बद से बदतर हो चुके हैं। अगर समय रहते यहां पर चिकित्सकों का इंतजाम कर दिया जाता तो आज महिलाओं को दर-दर की ठोकरें नहीं खानी पड़तीं। मंडी और सुंदरनगर के लिए दो मातृ शिशु अस्पताल केंद्र से मंजूर हैं। अगर समय रहते इनका निर्माण कर दिया जाता तो आज प्रसूता महिलाओं को अस्पताल में जमीन पर कंबल बिछा कर नवजात बच्चों के साथ नहीं सोना पड़ता।
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स्वास्थ्य विभाग के संज्ञान में है मामला
नागरिक अस्पताल सुंदरनगर के प्रभारी डॉ. मुस्सरत जावेद का कहना है कि गायनी चिकित्सक न होने का मामला विभाग के संज्ञान में है। जहां से शीघ्र ही चिकित्सक उपलब्ध करवाने के बारे में आश्वस्त किया गया है। फिलहाल जो महिलाएं प्रसूति के लिए आ रही हैं उन्हें मंडी रेफर किया जा रहा है।
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