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करसोग, गोहर बनेंगे परीक्षा मूल्यांकन केंद्र

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मंडी। अध्यापकों को वरिष्ठ, कनिष्ठ के भेदभाव और लालच को भुलाकर उलझना नहीं चाहिए। शिक्षकों को हर बार अपनी निजी मांगों को लेकर अपने कर्तव्य के प्रति कोताही नहीं करनी चाहिए। शिक्षकों को कर्तव्य परायण बनकर अपने शिष्यों को बेहतर शिक्षा देनी चाहिए। यह बात मंडी के बाल स्कूल में आयोजित जिले के समस्त शिक्षकों की बैठक में प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष सुरेश कुमार सोनी ने कही। उन्होंने शिक्षकों को इस बार बोर्ड के कई प्रमुख बदलावों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। इससे पहले उन्होंने उनको सम्मानित करने पर शॉल टोपी को स्वीकार नहीं किया। कहा कि यह एक व्यर्थ की परंपरा है, इससे शिक्षा विभाग पर अकारण ही आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। उन्होंने सभी शिक्षकों से इस परंपरा को खत्म करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इस बार जिले में दो मूल्यांकन केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। ये केंद्र गोहर और करसोग में स्थापित होंगे। इसके लिए उन्होंने डिप्टी डायरेक्टर को व्यवस्थाएं करने के आदेश दिए। उन्होंने कहा कि जिले में पहली बार पांच महिला परीक्षा केंद्र भी स्थापित होंगे। इनमें अभी भंगरोटू, सुंदरनगर और जोगिंद्रनगर को चयनित किया गया है, बाकी केंद्र भी जल्द ही तय किए जाएंगे। इससे पहले प्रिंसिपल काडर की ओर से सुंदर सिंह ठाकुर और हेडमास्टर काडर की ओर से मुख्याध्यापक सुखदेव ने बोर्ड के अध्यक्ष का स्वागत किया। इस मौके पर कन्या स्कूल मंडी के प्रधानाचार्य ने भी अपने विचार रखे। इस मौके पर हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के सचिव हरीश गज्जू, उच्च शिक्षा उपनिदेशक अशोक शर्मा सहित बोर्ड से आए हुए अन्य अधिकारी और जिलेभर के स्कूूलों के शिक्षक मौजूद रहे।
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प्रात:कालीन सभा को बनाएं आकर्षक
प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के निदेशक ने शिक्षकों का आह्वान किया कि वे स्कूलों में सालों पुरानी प्रात:कालीन सभा में कुछ नयापन लाएं। राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रीय गान की धुनों में एक-दूसरे से हटकर अंतर लाएं। इसके साथ ही सभा में देशभक्ति और राष्ट्रप्रेम से भरी गतिविधियों को भी शामिल किया जाए ताकि विद्यार्थियों में नया जोश पैदा हो।
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कदमताल जरूरी
शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष सुरेश सोनी ने कहा कि पहले पाठशालाओं में कदमताल करवाया जाता था। अब यह बहुत कम हो गया है। इस अभ्यास को सभी स्कूलों में रोजाना करवाया जाए। इससे जहां पूरे शरीर को तंदुरुस्ती मिलती है, वहीं बच्चों को कदम से कदम मिलाकर समाज में अपनी भूमिका निभाने के लिए भी प्रेरणा मिलती है।
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बच्चों की मन: स्थिति को समझें गुरुजन
शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष ने अध्यापकों से छात्रों की मन: स्थिति को समझने को कहा। उन्होंने कहा कि इस समय बच्चों में इतना हौसला है कि वह शिक्षकों को भी दो टूक जवाब दे देते हैैं। ऐसे में बच्चों से उलझना और उन पर दंडात्मक कार्रवाई करना भी ठीक नहीं। इसलिए गुरुजनों और अभिभावकों को बच्चों की मन: स्थिति को समझना बहुत जरूरी है।
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