सरकाघाट (मंडी)। ग्राम पंचायत गोपालपुर के अपर बताहलड़ी, अपर वड़ाल, अपर भैरो, कोटलू आदि गांवों के 35-40 परिवारों को पेयजल संकट से जूझना पड़ रहा है। प्रभावितों का कहना है कि पर्याप्त पानी न होने से उन्हें परेशानी हो रही है। प्रभावितों ने आईपीएच मंत्री महेंद्र सिंह से पेयजल व्यवस्था को दुरुस्त करने की गुहार लगाई है। संबंधित बस्ती के लोगों का कहना है कि यहां पेयजल व्यवस्था को बेहतर करने के लिए एक ग्रेविटी की पेयजल योजना है, लेकिन उसका कोई लाभ नहीं मिल रहा है। गर्मियों के मौसम शुरू होते ही इसके स्रोत का पानी सूख जाता है। पेयजल किल्लत होने से लोगों को एक किलोमीटर दूर नाले से मटमैला पानी सिर पर ढोना पड़ता है। महिला मंडल प्रधान और विधि चंद कौंडल, दामोदर दास, रणजीत सिंह, नंद लाल, रोशन लाल, रेलू राम, संत राम, सुरेंद्र, कर्म चंद, कमलेश, सुरजीत कुमार, हेमराज, सीता राम, गोपाल सिंह, बाली राम, अमर सिंह, लेखराज, दलीप सिंह, करतार सिंह और मरचू राम आदि कहना है कि सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग की ओर से निर्मित 28 करोड़ की कांडापतन-बैरा भदरोता पेयजल योजना से पंचायत के अन्य गांवों गोपालपुर, बैंझी, बडाल, कोटलू, मतेहड़ी, जुकैंन,और बाड़ू गांव को जोड़ा गया है लेकिन, अपर वडाल, अपर भैरो, अपर सौंडी, अपर मतेहडी और कोटलू आदि गांवों के लोगों को इस योजना से वंचित रखा गया है। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से वंचित गांवों को भी इस परियोजना से जोड़ने की मांग की है ताकि वर्षों से पेयजल संकट झेल रहे दलित समाज को भी पेयजल आपूर्ति हो सके और उन्हें गर्मियों के मौसम में नाले का पानी न पीना पड़े।
इस संदर्भ में जब विभाग के अधिशासी अभियंता एस के जसवाल से बात की गई तो उन्होंने बताया कि वे स्वयं प्रभावित गांव का दौरा करेंगे और समस्या के समाधान की कार्ययोजना तैयार करेंगे।