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प्याज, टमाटर के बढ़े भाव ने बिगाड़ा रसोई का स्वाद

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अमर उजाला ब्यूरो
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सुंदरनगर/मंडी। बाजार में सब्जियों की आवक मांग के अनुसार कम होने से भाव आसमान छूने लगे हैं। आलम यह है कि सब्जियों की कीमतें दालों जितनी हो गई हैं। टमाटर और प्याज 60 से 80 रुपये किलो तक बिक रहा है। बढ़ती कीमतों से महंगाई की मार झेल रहा आम आदमी परेशान हो गया है। इससे गृहिणियों का मासिक बजट पूरी तरह से बिगड़ गया है।
इन दिनों सब्जियों का स्वाद बढ़ाने वाले टमाटर का भाव 60-70 रुपये तक पहुंच गया है। नवंबर के शुरू में जहां सुंदरनगर और मंडी में टमाटर के दाम 40 रुपये किलो थे, वह अब बढ़कर 60-70 रुपये हो गए हैं। इस समय प्याज के दामों ने 70 का आंकड़ा पार कर दिया है। भिंडी 80 रुपये, शिमला मिर्च 60, घीया व तोरी 40, अरबी 60, बैंगन 30, जबकि फ्रांसबीन 80 रुपये किलो बिक रही है। सबसे कम दामों में बिकने वाला आलू भी अब गरीबों की पहुंच से दूर हो गया है। इसकी कीमत भी 20 से 30 रुपये प्रति किलो हो गई है। हरा मटर 80 रुपये किलो बिक रहा है। 25 रुपये प्रति दो सौ ग्राम बिकने वाले मशरूम के दाम भी 40 पार पहुंच गए हैं। सलाद में इस्तेमाल होने वाला खीरा बढ़कर 40 रुपये और मूली 20 रुपये किलो है। गाजर, हरी मेथी, पालक और सरसों का साग भी 40 रुपये किलोग्राम बिक रहा है। लहसुन के दाम 150 रुपये किलो हैं। फलों में केला 80, जपानी फल, सेब 80 और संतरा 100 रुपये किलो, जबकि पपीता 50 रुपये किलो तक मिल रहा है। हालांकि, अलग-अलग शहरों में भाव में अंतर भी देखा जा रहा है। इससे साफ है कि तेजी में मौका का फायदा उठाकर विक्रेता मनमाफिक दाम वसूल कर चांदी कूट रहा है। स्थानीय गृहणियों सुनीता देवी, ज्योति, मंजू, रक्षा देवी, मधुमति, सरोज ठाकुर का कहना है कि पहले ही देश में बढ़ती महंगाई के कारण पहले ही उनका बजट बिगड़ चुका है। इन दिनों सब्जी के दामों में भारी बढ़ोतरी के कारण वह और परेशान है।
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क्या कहते हैं अधिकारी और कारोबारी
इसके बारे में खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के निरीक्षक आतिश कुमार ने नियमों से अधिक वसूलने वाले सब्जी और फल विक्रेताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की बात की है। उधर, सब्जियों के दामों में आए उछाल के बारे में जब मंडी के सब्जी मंडी प्रधान देशराज राणा से बात की गई तो उन्होंने बताया कि प्याज और गोभी के दामों में ही बढ़ोतरी हुई है। अन्य सब्जियों के दामों में अधिक उछाल नहीं आया है। शीघ्र सभी सब्जियों और फलों के दाम कम होंगे।
क्या कहती हैं गृहिणियां
सुंदरनगर की गृहिणी भावना शर्मा का कहना है कि प्रदेश में आचार संहिता होने के कारण सरकार नाम की कोई चीज नहीं रह गई है। प्रशासनिक अधिकारी अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने के बजाए सोए पड़े हैं। इस कारण फलों व सब्जियों के दाम मनमाफिक हो गए हैं। इससे सबसे अधिक असर रसोई के बजट पर पड़ रहा है। पहले जो सब्जी किलो के हिसाब से खरीदी जाती थी अब वह पाव और आधा पाव खरीदनों को मजबूर हो गए हैं।
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सुंदरनगर क्षेत्र की गृहणी अंजू चंदेल पिछले दो माह से फलों और सब्जियों के भाव में निरंतर बढ़ोतरी होने से घर के खर्च में भारी इजाफा हो गया है। इससे माह का बजट बिगड़ गया है। शहर में विभिन्न स्थानों पर फलों और सब्जियों के भाव में अंतर से साफ है कि दुकानदार तेजी में मनमर्जी के दाम लेकर चांदी कूट रहे हैं।
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