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बारिश न होने से मंडी जिला में रूकी गंदम की बिजाई

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- फोटो : अमर उजाला
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गोहर (मंडी)। मंडी जिला में बारिश न होने के कारण गंदम की बिजाई रुक गई है। जिससे किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। गंदम के साथ सूखे ने मटर के उत्पादन पर भी प्रतिकूल असर डाल दिया है। जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। विशेषज्ञों की मानें तो अगर मौसम का मिजाज इसी तरह चलता रहा तो सेब की भावी फसल के उत्पादन में भी विपरीत असर पड़ सकता है। ऐसे में जिला मंडी के हजारों किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं। करीब तीन माह का समय हो चला है मगर बारिश का नामोनिशान नहीं है। मंडी जिला के दस ब्लाकों में गंदम की बिजाई लगभग लटकी हुई है। किसानों ने गंदम का बीज खरीद लिया है। मगर खेतों में नमी न होने के कारण किसान गंदम की बिजाई नहीं कर पा रहे हैं।
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यहां हो रही परेशानी
गोहर, बल्ह, सुंदरनगर, सदर, चौंतड़ा, जंजैहली, सरकाघाट, करसोग समेत अन्य ब्लॉकों में गंदम की बिजाई लटक गई है। उधर, आजकल मटर सीजन यौवन पर है तथा दाम भी आसमान छू रहे हैं। मगर सूखा पड़ने से मटर का उत्पादन थम गया है। एक तुड़ान के बाद मटर की फसल सिमट सी जा रही है। जिससे जिले के हजारों किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। आजकल मटर के 60 से 70 रुपये प्रति किलो दाम हैं। मगर सूखे ने किसानों की कमर तोड़कर रख दी है। अभी भी अगर आसमान बरस जाता तो किसानों की चांदी हो सकती है।

बगीचों में चल रहा साफ सफाई का दौर
मंडी जिले में इस समय बागवानों ने बगीचों की साफ सफाई का दौर चलाया हुआ है। बागवान आजकल बगीचों में गोबर खाद डालने के तैयार बैठे हैं। अगर बारिश नहीं होती है तो सेब के उत्पादन में भी गिरावट आ सकती है।
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किसानों की जुबानी
क्षेत्र के किसानों दीवान चंद, चंद्रमणी, बेसर राम, मोहन लाल, मनोज ठाकुर, गीतानंद, बिहारी लाल, पंकज कुमार और सोनू का कहना है कि बारिश न होने के कारण वे गंदम की बिजाई नहीं कर पा रहे हैं। कृषि विषयवाद विशेषज्ञ गोहर खूब राम चौहान ने बताया कि गंदम की बिजाई का समय निकलता जा रहा है। जिससे किसानों में चिंता है। उन्होंने कहा कि एक सप्ताह में अगर बारिश होती है तो किसान गंदम की बिजाई कर सकते हैं।

बारिश जरूरी
बागवानी विशेषज्ञ शिमला डा. एसपी भारद्वाज ने बताया कि सेब के पौधों के लिए बारिश और बर्फबारी जरूरी है। अगर सूखे का प्रभाव इसी तरह बढ़ता गया तो सेब की भावी फसल पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है तथा सेब पौधों को बीमारियां घेर लेंगी। वहीं गंदम और मटर की खेती भी प्रभावित होगी।
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