मंडी। बेशक दवाओं के असर से अब घायल बच्चों का दर्द तो कम हुआ है, लेकिन सदमा अभी गहरा है। आगरा में यमुना एक्सप्रेस हाईवे पर हुआ बस हादसा आलोक भारती स्कूल कोटली के दर्जनों विद्यार्थियों को ताउम्र का दर्द दे गया है। बच्चे अभी तक सदमे से उबरे नहीं है। मंडी अस्पताल से सोमवार तक 18 बच्चों और एक शिक्षक को छुट्टी मिल गई। बच्चों के चेहरे पर घर लौटने की खुशी तो थी लेकिन चेहरे पर अभी तक भाव शून्य है। हादसा इतना भयावह था कि टायर फटने के बाद करीब 200 मीटर तक जब बस बलखाती हुई चल रही थी तो चीखो पुकार का मंजर घायल बच्चों के दिल में घर कर गया।
आगरा में संस्थाओं से मिले सहयोग को नहीं भुला पाएंगे : प्रधानाचार्य
समय 12:10। स्थान आर्थो वार्ड का गेट। आगरा बस हादसे के घायल बच्चों के परिजन गेट पर खड़े हैं। आर्थो वार्ड में डाक्टर राउंड पर हैं। सिक्योरिटी वालों ने परिजनों को यहां पर रोक रखा है। इतने में आलोक भारती स्कूल के प्रधानाचार्य विक्रम ठाकुर मौके पर पहुंच जाते हैं। परिजनों से बात कर उनको ढांढस बंधाने का प्रयास करते हैं। यहां पर अधिकृत महिलाएं ही मौजूद हैं। विक्रम कहते हैं कि मैं भी उसी अभागी बस में था। सब सही चल रहा था कि अचानक टायर फटने की आवाज हुई। इसके बाद करीब 200 मीटर तक बस बलखाती हुई चलती है और एकाएक पलट जाती है। इस दौरान चीखो पुकार से माहौल भयावह हो जाता है। लेकिन, हादसे के बाद स्थानीय प्रशासन और स्वयंसेवी संस्थाओं से मिला सहयोग वह जिंदगी भर नहीं भूला सकेंगे। अभी तक आगरा का प्रशासन संपर्क कर रहा है। उन्होंने कहा कि हादसे के तुरंत बाद हेल्प एबीवीपी, विहिप और स्थानीय प्रशासन के सहयोग से मिला सहारा शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता।
केस नंबर वन
समय:12:20। आर्थो वार्ड। बेड नंबर 12। घायल बारहवीं कक्षा की छात्रा अभिना बेड पर बैठी हैं। मां सामने खड़ी है और ताया बायीं ओर। घायल बच्ची अब दर्द से उबर चुकी है लेकिन चेहरे पर हादसे का सदमा साफ नजर आ रहा है। अभिना की मां सुमन कहती हैं कि हादसे के सूचना सोशल मीडिया से मिली। कहती हैं कि जख्म तो भर जाएंगे। इतना कहते ही आंखें नम हो जाती हैं।
केस नंबर टू
समय:12:30। सर्जिकल वार्ड। बेड नंबर 41। घायल सातवीं कक्षा की मुस्कान के अगल-बगल रिश्तेदार बैठे हैं। पिता तिलकराज सामने खड़े हैं। तिलकराज से पूछा-अब बच्ची की तबीयत कैसी है, तो बोले तबीयत तो ठीक है। लेकिन, अभी तक बच्ची हादसे से उबर नहीं पाई है। बेड नंबर 42। 12वीं कक्षा की छात्रा प्रीति के सिर और बाजू पर गंभीर चोटें लगीं। अभी-अभी ड्रेसिंग होने से बच्ची दर्द से कराह रही है। परिजन सहारा देकर बच्ची को बिठाते हैं। सामने खड़ी दो महिलाएं नम आंखों से बच्ची को देख रही हैं।