जोगिंद्रनगर(मंडी)। कोरोना कर्फ्यू में मिली ढील के बाद उपमंडल में एचआरटीसी की बसों में सवारियों की दरकार है। बीते 72 घंटों में 90 से अधिक रूटों पर दौड़ी निगम की बसें तेल खर्चा भी पूरा नहीं कर पाई हैं। 20 से तीस किलोमीटर के सफर में भी बड़ी मुश्किल से तीन सौ से पांच सौ रुपये तक का कैश एकत्रित हो पा रहा है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्र के कुछ रूट बंद होने की कगार पर हैं। बुधवार को निजी बसों के शुरू होते ही परिवहन निगम की बसों में यात्रियों की खूब कमी खली। जोगिंद्रनगर से चौहारघाटी के दुर्गम क्षेत्र बड़ागांव में 130 किलोमीटर का सफर पूरा करने के बाद भी यात्रियों की दरकार रही। यहां महज 1600 रुपये का कैश निगम के खजाने में जमा हो पाया जबकि चार हजार से अधिक डीजल पर निगम को खर्चने पड़े। गलू-बनाड़ रूट पर भी निगम को बड़ी मुश्किल से तीन सौ रुपये का कैश ही मिल पाया। अन्य ग्रामीण रूटों पर दौड़ाई गई बसें भी निगम के खजाने को चपत लगा गई। बुधवार को जोगिंद्रनगर बस अड्डे से चड़ौंझ, खजरी, गोलवां कटवाली, समोहली, बैजनाथ, गलू पट्ट, नौहली, पधर, कुफरी, कोटली, खुड्डी, ढगौण, खड़ीहार ग्रामीण रूटों पर चली निगम की बसों में 25 से तीस प्रतिशत ही सवारियां सफर कर पाई।
निगम और निजी बस संचालकों में प्रतिस्पर्धा
जिला भर में सवारियों को लेकर निगम और निजी बसों के चालकों और परिचालकों में भी प्रतिस्पर्धा का माहौल देखा गया। कुछ रूटों पर सवारियां हासिल करने के लिए निगम और निजी बस संचालकों में गहमागहमी का भी माहौल रहा।
जोगिंद्रनगर बस अड्डे में बीते तीन दिनों में 90 से अधिक रूटों पर निगम की बसों को दौड़ाया गया। बुधवार को बारिश के चलते निगम की बसों में यात्रियों की संख्या कम रही। ग्रामीण क्षेत्र के लोगों की सुविधा के लिए निगम की बसों की आवाजाही निरंतर जारी रहेगी। अन्य समस्याओं को लेकर निगम के उच्चाधिकारियों से लगातार बातचीत जारी है।
-कुलदीप ठाकुर, क्षेत्रीय प्रबंधक बैजनाथ