मंडी। जो देव रथ 50 वर्ष पुराना हो वहीं कारदार अपने देवता का पंजीकरण करवाने के लिए आएं। अगर कोई देवता घर का हो और 50 वर्ष पुराना हो तो वह मान्य नहीं होगा। उसका पंजीकरण नहीं किया जाएगा। यह बात सर्वदेव सेवा समिति की बैठक में प्रधान शिवपाल शर्मा ने कही। उन्होंने कहा कि महाशिवरात्रि में कुछ देवता जो मेले में नहीं आते हैं, अगर वह भाग लेते हैं तो कमेटी उनका स्वागत करती है। उन्होंने कहा कि पहली बार चौहारघाटी के देवताओं की ओर से सेरी मंच पर देव खेल का आयोजन किया जाएगा। इसके लिए डीसी के पास प्रस्ताव रखा जाएगा। बैठक में विभिन्न मुद्दों पर सहमति जताई गई। प्रधान शिवपाल शर्मा ने कहा कि बैठक में मेले के दौरान मिठाई की जगह काजू, बादाम देने, देवनाटी के लिए अपनी वेशभूषा में आने, मेले के दौरान 101 कन्या और 9 प्रमुख देवियों की पूजा-अर्चना सेरी मंच करने पर सभी ने सहमति जताई है। पड्डल में डोम और शेड न बनाकर देवलुओं ने प्राचीन प्रथा बरकरार रखने पर सहमति जताई है। उन्होंने मेला कमेटी से मांग की है कि लकड़ी का कोटा बार-बार मांगने की बजाय एक बार में ही दिया जाए। मंदिरों में कैमरे लगवाने और सीएम से मिलने पर भी सहमति बनी। इसके अलावा प्राचीन देवताओं को दस हजार रुपये और पंजीकृत देवता को 5 हजार रुपये बढ़ोतरी करने की मांग रखी। प्रदेश सरकार से मांग की गई कि जो मंदिर, सराय आदि सरकारी भूमि पर हैं, उसे देवता के नाम किया जाए। उन्होंने कहा कि सर्वदेवता सेवा समिति की ओर से जो प्रतिबद्धता पत्र बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ और कन्या भ्रूण हत्या पर तैयार था, उसे अनुमोदित कर सभी 216 देवी-देवताओं के दरबार में प्रकाशित किया जाएगा। कारदारों ने मांग रखी कि देवी-देवताओं को जो सरकार द्वारा सराय एवं अन्य निर्माण के लिए जो राशि जारी की जाती है, उसका भुगतान कारदारों को सीधे तौर पर किया जाए। जलेब में प्रशासन से तालमेल पर सहमति जताई जाएगी।
इस मौके पर समिति के सचिव युद्ध कुमार सिंह, उपप्रधान भीम चंद सरोच, वेदराम, संगठन सचिव राजू पटियाल, रेवती राम, धर्मेंद्र कुमार, मनोज कुमार, नीलमणि, हिम्मत राम, बाला राम, शेरा राम, हिरा सिंह, छिज्जु राम, राजू राम, दिनेश, हुकम चंद आदि ने भाग लिया।