मंडी। चंडीगढ़ मनाली एनएच पर नियमों को ताक पर रखकर तेजरफ्तार वाहन चलाने वालों पर मंडी पुलिस कड़ी कार्रवाई करने जा रही है। स्पीड से अधिक वाहन चलाया तो पुलिस वाहन की तस्वीर लेकर मालिक के घर तक पहुंच सकती है और आपको पता भी नहीं चलेगा। यह संभव होगा अत्याधुनिक डॉपलर रडार तकनीक से। मंडी की स्मार्ट पुलिस इस आधुनिक तकनीक से जुड़ चुकी है। जिससे पुलिस सड़कों पर ओवर स्पीड वाहनों को डिटेक्ट कर सकेगी और बेलगाम चालकों पर शिकंजा कसा जाएगा। तय स्पीड लिमिट से अधिक दौड़ने वाले वाहनों की स्पीड तो यह उपकरण कैप्चर करेगा ही, साथ ही उस वाहन की नंबर समेत पिक्चर भी खींचने के साथ तिथि और समय का भी उल्लेख होगा। ऐसे में तेज रफ्तार चलकर आम लोगों और वाहन में बैठी सवारियों की जान जोखिम में डालने वाला बच नहीं सकेगा। हालांकि पहले भी डॉपलर रडार थे लेकिन, उसमें सिर्फ गाड़ी की स्पीड ही डिटेक्ट की जाती थी, तस्वीर नहीं आती थी। जिससे पुलिस कार्रवाई पर संबंधित वाहन चालक कई तरह के सवाल उठाते थे। अब ऐसा नहीं हो सकेगा। हालांकि इस सुविधा से मंडी पुलिस को पहले भी लैस किया था। लेकिन, यह उपकरण कार्य में नहीं लाए जा सके थे। कुछ तकनीकी खामियों को ठीक करके इन्हें पुन: उपयोग में लाया गया है। जिला में सदर, सुंदरनगर और औट समेत पांच पुलिस थानों को इस सुविध से लैस किया गया है।
100 से 200 मीटर तक आ जाएगी तस्वीर
यह उपकरण 100 से 200 मीटर के दायरे में ओवरस्पीड वाहनों को डिटेक्ट करने और उन्हें कैप्चर करने में सक्षम है। ऐसे में पुलिस एनएच के किनारे कहीं बैठकर तेजरफ्तार वाहनों पर शिकंजा कस सकती है। हालांकि रात को भी अगर पर्याप्त लाइट हो तो वाहन की फोटो खींची जा सकती है।
सड़क हादसों में कमी आने की उम्मीद
सलापड़ पुल से लेकर सुंदरनगर, नेरचौक, मंडी से पंडोह-औट का क्षेत्र हादसों के लिए सर्वाधिक संवेदनशील है। यहां हादसों का ग्राफ निरंतर बढ़ता जा रहा है। अधिकांश हादसे चालकों की लापरवाही या ओवरस्पीड के कारण होते हैं। ऐसे में दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में ऐसे डॉपलर रडार का होना सड़क हादसों को रोकने में कारगर साबित हो सकता है।
कसेगा शिकंजा,15 चालान काटे : एसएचओ
सदर थाना प्रभारी सुनील सांख्यान ने कहा कि एनएच पर तय लिमिट से अधिक रफ्तार से वाहन दौड़ाने वालों पर डॉपलर रडार से शिकंजा कसा जा सकेगा। काफी समय से यह सुविधा बंद पड़ी थी। जिसे फिर से नए सिरे से शुरू किया गया है। मंडी में इस तकनीक के तहत पंद्रह चालान काटे जा चुके हैं।