सड़क, स्वास्थ्य और रोजगार की मांग को लेकर उमड़ी चार पंचायतों की भीड़
बुधवार तक काम शुरू न होने पर काम रोकने की चेतावनी
संवाद न्यूज एजेंसी
करसोग (मंडी)। सतलुज जल विद्युत परियोजना चरण-2 से प्रभावित क्षेत्रों की अनदेखी को लेकर करसोग में एसजेवीएनएल और प्रशासन के खिलाफ जनता का भारी रोष देखने को मिला। विधायक दीप राज के नेतृत्व में मंगन, परलोग, बेलूधांक सहित चार पंचायतों के सैकड़ों ग्रामीणों ने एसडीएम कार्यालय के बाहर करीब तीन घंटे तक जोरदार धरना प्रदर्शन किया। इस दौरान अपनी मूलभूत सुविधाओं की आवाज उठाने के लिए स्कूली बच्चे भी हाथों में तख्तियां लेकर धरना स्थल पर पहुंचे।
प्रदर्शनकारी प्रशासन से दफ्तर के बाहर आकर जनता के बीच बैठकर समस्याएं सुनने की मांग पर अड़े रहे। माहौल बिगड़ता देख आखिरकार एसडीएम और एसजेवीएनएल के अधिकारी बाहर आए और लोगों की समस्याएं सुनीं। धरने में विधायक ने आरोप लगाया कि एसजेवीएनएल प्रबंधन करसोग के प्रभावित क्षेत्रों के साथ सौतेला व्यवहार कर रहा है। शिमला ग्रामीण की तुलना में करसोग को कम बजट दिया जा रहा है और लाडा के तहत मिले 9 करोड़ रुपये भी पूरी तरह खर्च नहीं हो पाए हैं।
धरने में पहुंचे बच्चों ने बताया कि उन्हें रोजाना चार किलोमीटर पैदल चलने के बाद सतलुज नदी पर बने झूलापुल को पार कर जोखिम में जान डालकर स्कूल जाना पड़ता है। ग्रामीणों ने लोहे के पुल, पक्की सड़क, स्वास्थ्य संस्थान और स्थानीय युवाओं को रोजगार देने की प्रमुख मांगें रखीं।
प्रभावित जनता ने चेतावनी दी है कि यदि बुधवार तक मरौला-बिंदला सड़क का काम धरातल पर शुरू नहीं हुआ, तो परियोजना स्थल पर जाकर एसजेवीएनएल का काम पूरी तरह रोक दिया जाएगा। अब ग्रामीण केवल आश्वासनों से संतुष्ट नहीं होंगे, बल्कि जमीन पर काम चाहते हैं।