रिवालसर में महाकुंभ में धर्मगुरु दलाईलामा के दर्शन करते श्रद्धालु।
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रिवालसर (मंडी)। धर्मगुरु दलाईलामा ने कहा कि 21वीं सदी को शांतिप्रिय सदी बनाने की जरूरत है। दुनिया को गत सदियों में हुई गलतियों से सबक लेना चाहिए। वीरवार को पवित्र रिवालसर झील किनारे हजारों बौद्ध श्रद्धालुओं को दीर्घ आयु अभिषेक का रसपान करवाया।
उन्होंने कहा कि प्रेम, करुणा, मैत्री सभी धर्मों का मूल मंत्र है। दलाईलामा ने बौद्ध भक्तों को धर्म का ज्ञान बांटते हुए कहा कि मानव जीवन की प्राप्ति दुर्लभ है। इसे बेकार न जाने दें। जीवन का ज्यादा से ज्यादा परहित में उपयोग करें। संसार में मानव जाति की चाहत रहती है कि जीवन में सुख ही सुख रहे। कभी दुख न आए। उन्होंने कहा कि आज के युग में मनुष्य को अपने प्रज्ञा का उपयोग सकारात्मक रूप में करने की आवश्यकता है। गत सदियों में गंभीर विश्व युद्ध हुए। इनमें करोड़ों लोगों की जान चली गई।
इस गलती को दोहराने से बचने की जरूरत है। कहा कि धर्मों के बीच सद्भाव होना आवश्यक है। हमें सभी धर्मों का आदर एवं सम्मान करना चाहिए। बौद्ध धर्म ग्रंथों की संख्या तीन सौ से ज्यादा है। उन ग्रंथों को पूजा ग्रह में सजा कर रखने की बजाय उन्हें पढ़ें। प्रवचन करने से पूर्व दलाईलामा ने वीरवार के अभिषेक के लिए साधना की। उस दौरान हजारों बौद्ध भक्तों ने प्रज्ञा पारंमिता हृदय सूत्र एवं आर्यतारा की स्तुति की। महामहिम शुक्रवार सुबह त्रिवेणी धर्म नगरी रिवालसर से सुबह 6 बजे धर्मशाला के लिए प्रस्थान करेंगे।