सराज क्षेत्र की बागाचणोगी पंचायत के चौहट गांव में देव विष्णु मतलोड़ा की नवनिर्मित कोठी।
- फोटो : अमर उजाला
थुनाग (मंडी)। सराज घाटी के बड़ोदव विष्णु मतलोड़ा की भव्य कोठी की प्राण प्रतिष्ठा के दो दिवसीय समारोह में हजारों लोगों का सैलाब उमड़ पड़ा। पारंपरिक देव वाद्य यंत्रों की ध्वनि पर देव विष्णु मतलोड़ा ने बुधवार को रात नौ बजे के करीब कोठी की प्राण प्रतिष्ठा के बाद मंदिर में प्रवेश किया। पारंपरिक वाद्य यंत्रों की ध्वनि और हजारों श्रद्धालुओं के जयकारों की गूंज से सराज घाटी में माहौल देवमय हो गया। दो दिवसीय समारोह में 20 हजार के लगभग श्रद्धालुओं ने देवता के दरबार शीश नवाया।
समारोह के समापन पर 35 क्विंटल चावल से विशाल धाम का आयोजन किया गया। धाम में 11 क्विंटल देसी घी का प्रयोग किया गया। 200 बोटियों (रसोइये) ने धाम को तैयार किया। बुधवार को देर शाम नौ बजे के बाद देव विष्णु मतलोड़ा ने 15 किलो चांदी के आसन को ग्रहण किया। इस दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धा और उल्लास से भरे दस हजार के लगभग श्रद्धालुओं और देवलुओं ने बड़ादेव के जयकारे लगाए। सुबह सात बजे से जारी भंडारे का दौर देर शाम तक जारी रहा। मुख्य कारीगर शेष राम, मंगलू राम, बलि राम सहित 72 कारीगरों ने सराज क्षेत्र की सबसे मंहगे देवालय का निर्माण किया है। इस अवसर पर मंदिर कमेटी के प्रधान प्यारे राम, तिमर सिंह उप प्रधान, नाहर मल कोषाध्यक्ष, कैथ ठाकुर दास, कमेटी के जज रामेश्वर और सात हारियों के गुर उपस्थित रहे। समारोह में मिल्क फेडरेशन के चेयरमैन चेत राम ठाकुर सहित विधायक जय राम, सराज कांग्रेस ब्लाक के अध्यक्ष जगदीश रेड्डी ने भी देवता के दरबार शीश नवाया।
बाक्स.........
मुख्य द्वार पर उकेरे भगवान विष्णु के 24 स्वरूप
सात साल में निर्मित भवन में लगे दस करोड़ रुपये
बड़ादेव विष्णु मतलोड़ा की इस नवनिर्मित कोठी को क्षेत्र की सबसे महंगी कोठी माना जा रहा है। मंदिर के मुख्य द्वार पर काष्ठकुणी शैली में बेजोड़ नक्काशी की गई है। कुल 11 कारीगरों को कोठी के मुख्य द्वार को बनाने में दो साल का वक्त लगा है। कोठी के मुख्य दरवाजे पर भगवान विष्णु के 24 स्वरूपों को उकेरा गया है। स्थानीय लोगों व मंदिर कमेटी के सदस्यों के अनुसार सात साल में निर्मित भवन में दस करोड़ रुपये से अधिक की लागत आई है। चंडीगढ़ से देवता के दर्शनों को चोहट पहुंचे होशियार सिंह व थुनाग के मुकेश, कुल्लु के राजेश ने कहा कि दरवाजे पर की गई नक्काशी अद्भुत है। देव के दर्शनों के लिए बाहरी राज्यों में बसे क्षेत्र के बाशिंदे चोहट गांव पहुंचे। लेकिन, क्षेत्र में लचर सड़क व्यवस्था से श्रद्धालुओं को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।