मंडी। मुख्यमंत्री के गृह जिला मंडी के जोनल अस्पताल में गायनी एमडी के समकक्ष चल रहे डीएनबी कोर्स की मान्यता पर संकट पैदा हो गया है। मंडी जोनल अस्पताल में गायनी विशेषज्ञ न होने से यह नौबत आई है। गायनी विशेषज्ञ डॉ. कपिल मल्होत्रा के निधन के बाद कोर्स कर रहे पहले और तीसरे वर्ष के 6 प्रशिक्षु चिकित्सकों का प्रशिक्षण रुक गया है। नियमों के अनुसार यदि तीन माह तक आठ एवं पांच साल के अनुभव वाला कोई गायनी विशेषज्ञ तैैनात नहीं किया गया तो मंडी से यह कोर्स छिन जाएगा। इससे जोनल अस्पताल में कोर्स कर रहे 6 प्रशिक्षुओं का भविष्य भी अंधकारमय हो जाएगा। इन प्रशिक्षुओं का चयन नीट के तहत ली जाने वाली परीक्षा से होता है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. जीवानंद चौहान ने कहा कि सरकार को सारी स्थिति से अवगत करवा दिया गया है और सरकार जल्द ही इस विषय में प्रभावशाली कदम उठाएगी।
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नहीं मिल रहा इलाज
वर्तमान में जोनल अस्पताल में गायनी विशेषज्ञ न होने से गर्भवती महिलाओं को भारी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। हर छोटे और बड़े केस को नेरचौक मेडिकल कॉलेज रेफर किया जा रहा है। प्रसव, ऑपरेशन आदि महिला रोगों का इलाज नहीं हो पा रहा है।
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2017 में मिली थी सीटें
भारत सरकार के नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन ने वर्ष 2017 में प्रदेेश के तीन अस्पतालों मंडी, सोलन और टांडा मेडिकल कॉलेज में गायनी से संबंधित एमडी के समकक्ष कोर्स करने के लिए सीटें स्वीकृत की थीं। इसके तहत गायनी विशेषज्ञ बनने के लिए तीन साल का कोर्स आठ एवं पांच साल के अनुभव वाले गायनी विशेषज्ञ डॉक्टरों की देख रेख में चलाए जा रहे थे। इन प्रशिक्षुओं के लिए ये डॉक्टर कंसलटेंट माने जाते हैं।
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