अब वार्ड में दाखिल मरीजों का ही होगा अल्ट्रासाउंड
सामान्य रोगियों को जाना होगा नेरचौक मेडिकल कॉलेज
डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे मंडी अस्पताल में नई व्यवस्था
अमर उजाला ब्यूरो
मंडी। क्षेत्रीय अस्पताल मंडी में अब केवल वार्ड में दाखिल मरीजों के ही अल्ट्रासाउंड किए जाएंगे। ओपीडी में आने वाले रोगियों के अल्ट्रासाउंड नहीं होंगे। सामान्य रोगियों को चौदह किमी दूर नेरचौक मेडिकल कॉलेज जाना होगा। चिकित्सकों की कमी से जूझ रहे जोनल अस्पताल ने यह नए फरमान निकाल दिए हैं। इससे सस्ते इलाज की चाह में मंडी अस्पताल का रुख करने वाले रोगियों के लिए परेशानी खड़ी हो गई है। रोगियों को मजबूरन या तो निजी अल्ट्रासाउंड केंद्रों का रुख करके जेब ढीली करनी होगी या फिर चौदह किमी दूर नेरचौक मेडिकल कॉलेज में पहुंचकर अल्ट्रासाउंड के लिए कतार में लगना होगा। गौरतलब है कि मंडी जोनल अस्पताल में जिले भर से मरीज इलाज करवाने पहुंचते हैं। पहले मेडिकल कॉलेज अटैच होने के बाद यहां सुविधाएं कुछ हद तक सामान्य थीं, लेकिन मेडिकल कॉलेज शिफ्ट होने के साथ चिकित्सकों के भी शिफ्ट हो जाने के चलते यहां स्वास्थ्य सुविधाएं हाशिये पर हैं। लोगों को मंडी जोनल अस्पताल में इलाज के लिए तरसना पड़ रहा है।
150 की बजाय अब देने होंगे 1000 रुपये
जोनल अस्पताल में अल्ट्रासाउंड के लिए मरीजों को 150 रुपये देने पड़ते हैं। आरकेएस की निर्धारित दरों पर भी सस्ती अल्ट्रासाउंड सेवा तय है। जबकि, बीपीएल और अन्य योजनाओं के तहत यह सेवा अधिक सस्ती है। लेकिन मजबूरन अब सामान्य रोगियों को चौदह किमी दूर 28 रुपये बस का किराया खर्च करके मेडिकल कॉलेज का रुख करना होगा। इससे समय की बर्बादी भी होगी। या तो निजी क्लीनिकों का रुख कर एक हजार तक रुपये खर्च करके अल्ट्रासाउंड करवाना पड़ेगा।
फरवरी 2019 तक फुल बुकिंग
अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक रोगियों को फरवरी 2019 तक एडवांस में अल्ट्रासाउंड के लिए तारीखें दी गई हैं। स्टाफ की कमी के कारण तय तारीखों में भी अल्ट्रासाउंड निपटाना मुश्किल हो रहा है। जबकि रोगियों की ओपीडी 700 से 1000 तक पहुंच रही है। ऐसे में सामान्य रोगियों को अल्ट्रासाउंड सुविधा करवाना टेढ़ी खीर साबित हो रही है।
ऐसी व्यवस्था मजबूरी : केएस मल्होत्रा
एमएस केएस मल्होत्रा का कहना है कि अल्ट्रासाउंड के लिए एक ही चिकित्सक है। विभिन्न विभागीय कार्यों में वह भी व्यस्त रहते हैं। जबकि 2019 तक पहले ही अल्ट्रासाउंड की तिथियां दे दी गई हैं। ऐसे में सामान्य रोगियों के लिए अल्ट्रासाउंड सुविधा मुहैया करवाना मुश्किल हो रही है। जब तक चिकित्सक की उपलब्धता नहीं होती यही व्यवस्था रखना मजबूरी है। जबकि आपातकाल और वार्ड में दाखिल रोगियों को अल्ट्रासाउंड की सुविधा मुहैया करवाई जा रही है।