मंडी। अब मंडी जिले के दुर्गम क्षेत्रों के स्वास्थ्य केंद्रों में बिना डॉक्टरों के भी इलाज संभव हो पाएगा। डॉक्टर की गैरमौजूदगी में अब मरीज बैरंग नहीं लौटेंगे। रोगियों का इलाज दूरभाष से होगा। इसे टेलीमेडिसन का नाम दिया गया है। मंडी जिले में प्रथम चरण में टेलीमेडिसन के लिए सात स्वास्थ्य केंद्र चिन्हित हुए हैं। इन्हें इस आधुनिक सुविधा से जोड़ा जाएगा। बाद में तमाम दुर्गम क्षेत्रों में यह व्यवस्था लागू होगी। चौहार वैली, करसोग और सराज घाटी के अति दुर्गम क्षेत्रों को टेलीमेडिसन योजना में शामिल किया गया है। शनिवार को अपने दौरे के दौरान सीएम इन केंद्रों का शुभारंभ करने जा रहे हैं।
जिले के इन केंद्रों में गुम्मा, केयोलीधार, भाटकीधार, टांडी, देवीदड़, पधर और जंजैहली शामिल हैं। इन दुर्गम स्थानों में लोगों को इलाज के लिए भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। कभी बरसात और कभी बर्फबारी इन स्थानों को जिले से अलग कर देते हैं। ऐसे में कई बार इलाज नहीं होने के चलते लोगों की मौत तक हो जाती है। लेकिन अब सरकार की इस योजना से इन्हें आपात समय में तुरंत उपचार मिल पाएगा। उधर, सीएमओ डॉ. जीवानंद चौहान ने कहा कि प्रदेश के साथ ही जिला मंडी के सात दुर्गम स्थानों को टेलीमेडिसन सुविधा के लिए चयनित किया गया है। मुख्यमंत्री शनिवार को इस सुविधा का शुभारंभ करेंगे। उन्होंने कहा कि आपातकालीन समय में इन क्षेत्रों में यह सुविधा बेहतर साबित होगी।
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इस तरह होगी टेलीमेडिसन प्रक्रिया
टेेलीमेडिसन प्रक्रिया के तहत दुर्गम क्षेत्रों में जब भी कोई मरीज जाएगा तो वहां पर पर्ची बनाने के बाद नर्स मरीज के बारे में चिकित्सक को पूरी जानकारी देगी। इस पर डॉक्टर नर्स को तुरंत राहत देने को मेडिसन बताएगा। इस पर मरीज को तुरंत उपचार मिल जाएगा।
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