मंडी। अपने वेतन से स्कूल में छात्राओं के लिए शौचालय बनाने वाले शाला स्कूल के प्रधानाचार्य सुरेश गौतम ने पांचवीं बार स्कूल को स्वच्छता का तमगा दिलाया।
जहां एक ओर केंद्र सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर स्कूलों को स्वच्छ बनाने के प्रयास के बावजूद शहरी क्षेत्रों के स्कूल खंड स्तर पर भी स्वच्छता में पिछड़ गए हैं। वहीं, जिले के ग्रामीण क्षेत्र की राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला शाला में तैनात प्रधानाचार्य सुरेश गौतम अपने वेतन से स्कूल में स्वच्छता के नए आयाम स्थापित किए हैं। वह प्रदेशभर में सेवाएं देते हुए पांच दफा जिला एवं खंड स्तर पर स्वच्छता का तमगा चार स्कूलों को दिला चुके हैं। अपने 33 वर्ष के कार्यकाल में वह दुर्गम क्षेत्रों में सराहनीय कार्य कर चुके हैं। बतौर मुख्य अध्यापक और प्रधानाचार्य वह सातवें स्कूल में सेवाएं दे रहे हैं। इस दौरान पांचवीं दफा स्वच्छता का इनाम जीत चुके हैं। शाला स्कूल में प्रधानाचार्य ने अपने एक माह का वेतन खर्च कर छात्राओं के लिए शौचालय बनवाया। इसके परिणामस्वरूप अब स्कूल को खंड स्तर पर स्वच्छता के प्रथम पुरस्कार मिला है।
चार स्कूलों को दिला चुके हैं स्वच्छता में इनाम
इससे पहले भी प्रधानाचार्य सुरेश गौतम चार स्कूलों को पांच बार जिलास्तर और खंड स्तर पर इनाम दिला चुके हैं। शाला स्कूल में सेवाएं देते हुए उन्होंने अपने एक माह के वेतन से लड़कियों के लिए शौचालय बनवाया। वहीं, मुंदडृ स्कूल में भी सेवाएं देते हुए 2011 में खंड स्तर पर और वर्ष 2012 में जिला स्तर पर स्कूल में स्वच्छता में अग्रणी बनाकर प्रथम पुरस्कार जीते। इस स्कूल में भी वेतन से प्रधानाचार्य ने किचन और शौचालय बनवाया। इसके बाद 2014 में तल्याहड़ स्कूल को जिलास्तर पर प्रथम स्थान दिलवाया। इस स्कूल में डस्टबिन के लिए अपनी जेब से हजारों रुपये खर्च किए। वहीं, सिरमौर जिला के दुर्गम क्षेत्र शिलाई खंड के कोटापाव स्कूल को खंड स्तर पर स्वच्छता में अव्वल बनाया। इस स्कूल में एक लाख 26 हजार रुपये अपनी जेब से खर्च कर उन्होंने किचन, मंच और शौचालय का निर्माण किया।
कोट्स
उच्च शिक्षा उपनिदेशक मंडी अशोक शर्मा ने सभी स्कूल प्रमुखों को स्वच्छता में पुरस्कार हासिल करने के लिए बधाई दी है। उन्होंने कहा कि प्रधानाचार्य सुरेश गौतम अन्य शिक्षकों के लिए मिसाल है। स्कूल की संपत्ति को अपनी संपत्ति समझकर संवारा जाए तो स्वच्छता में हर आयाम हासिल हो सकता है।