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जातीय बंधनों को तोड़ महज पांच जोड़े ही बन सके लखपति

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मंडी। इसे विभागीय कार्यप्रणाली की कमी कहें या जनता में जागरूकता का अभाव। जातीय बंधनों को तोड़कर परिणय सूत्र में बंधने वाले महज पांच जोड़े ही केंद्र की डा अंबेडकर स्कीम फॉर सोशल इंटिग्रेशन को अपनाकर लखपति बन सके हैं। जबकि यह योजना दो साल पहले से चल रही है। लोग इस योजना से वाकिफ नहीं हैं। हालांकि, विभाग का दावा है कि समय समय पर जागरूकता अभियान के तहत केंद्र की इस योजना के बारे में बताया जाता है। यदि ऐसा है तो दो साल में महज पांच दंपतियों का ही इस योजना के तहत लाभ उठाना विभाग की कार्यशैली पर प्रश्नचिन्ह लगा रहा है। देेश में जातीय भेदभाव मिटाने के लिए सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय भारत सरकार की ओर से भी अंतर जातीय विवाह योजना पर प्रोत्साहन राशि दी जाती है। सभी राज्यों में इस योजना की राशि में अंतर है। प्रदेश में यह योजना अंतरजातीय प्रोत्साहन योजना के नाम से चलाई जा रही है। जिसमें 50 हजार की प्रोत्साहन राशि का प्रावधान है। इस योजना के तहत सालाना टारगेट तो विभाग पूरा कर रहा है लेकिन, केंद्र से संबंधित योजना के तहत न के बराबर मामले आ रहे हैं।
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2013-14 में शुरू हो गई है योजना
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय भारत सरकार की ओर से भी अंतरजातीय विवाह योजना पर प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। लेकिन, इस योजना में डा. अंबेडकर प्रतिष्ठान भागीदारी बन गया है। यानी अब केंद्र सरकार और डा. अंबेडकर प्रतिष्ठान संस्थान की तरफ से ऐसे जोड़ों को 2 लाख 50 हजार की राशि प्रोत्साहन के तौर पर दी जा रही है। सभी राज्यों में यह योजना लागू हो गई है। हालांकि यह योजना वर्ष 2013-14 में शुरू हो गई है, लेकिन योजना का प्रभाव 1 अप्रैल 2015 से देखने को मिला है।

किस्तों में जारी होती है राशि
इस योजना का लाभ लेने के लिए विभाग की तरफ से ऐसे जोड़ों को कुछ औपचारिकताएं पूरी करने के बाद यह राशि किस्तों में प्रदान की जाती है। जनहित में जारी इन स्कीमों के तहत यदि अनुसूचित जाति वर्ग के युवक या युवती से कोई भी पिछड़ा अथवा सामान्य वर्ग का युवक या युवती विवाह करते हैं तो यह लाभ मिलेगा। इसके लिए शर्त है कि कोर्ट मैरिज होनी चाहिए। यह आवेदन शादी के एक वर्ष के भीतर किया जाना चाहिए। राज्य सरकार से इस स्कीम का लाभ लेने वाले लोग इस स्कीम का लाभ नहीं उठा सकते हैं।
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योजना का लाभ लेने के लिए पात्रता
इस योजना को सामाजिक एकीकरण डा. अंबेडकर अंतरजातीय विवाह योजना के नाम से जाना जाता है। इस योजना का लाभ लेने के लिए दंपति से एक का सामान्य जाति और एक का अनुसूचित जाति से होना सबसे अधिक जरूरी है। वहीं यह विवाह हिंदू विवाह अधिनियम 1955 के तहत होना चाहिए। दूसरी शादी पर इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा।

आवश्यक दस्तावेज
योजना के लाभ के लिए आवेदन पत्र के साथ कुछ दस्तावेज होने जरूरी हैं। इनमें जाति प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, जन्म तिथि के लिए दसवीं का प्रमाण पत्र या अन्य दस्तावेज, पूरा पता पिन कोड के साथ, विवाह का प्रमाण पत्र, आधार लिंक ज्वाइंट बैंक खाता, विधायक या सांसद से सिफारिश लेटर, जिला मजिस्ट्रेट, जिला कल्याण विभाग और उपायुक्त से सिफारिश लेटर शामिल हैं। यह सभी दस्तावेज डायरेक्टर डा. अंबेडकर फाउंडेशन को दिल्ली में प्रेषित करने होंगे।

जागरूकता के लिए लगाए जाते हैं शिविर : समीर
जिला कल्याण अधिकारी मंडी समीर ने बताया कि विभाग की तरफ से लोगों को इन योजनाओं के बारे में जागरूक करने के लिए समय-समय पर जागरूकता शिविरों का आयोजन किया जाता है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया है कि कोई भी व्यक्ति इन योजनाओं के बारे में विस्तृत जानकारी लेकर इनका पूरा लाभ उठा सकता है।
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