किशोरियों व उनके अभिभावकों को जागरूक करने की जरूरत
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। 14 से 15 वर्ष तक की किशोरियों को सर्वाइकल कैंसर से बचाने के लिए शुक्रवार को मंडी जिले के अस्पतालों में चिह्नित 69 केंद्रों पर ह्यूमन पैपीलोमा वायरस (एचवीपी) टीकाकरण किया गया। शाम तक सभी केंद्रों में कुल 207 किशोरियों का टीकाकरण किया गया। 28 मार्च से शुरू हुए इस अभियान में पहले मंडी जिलेभर में 836 किशोरियों का टीकाकरण हुआ था, लेकिन शुक्रवार को किए गए टीकाकरण को मिला कर यह आंकड़ा अब तक 1044 पहुंच गया है।
15 वर्ष की आयु पुरी कर चुकी किशोरियों को सर्वाइकल कैंसर से बचने के लिए केंद्र सरकार की ओर से देश भर में ह्यूमन पैपीलोमा वायरस (एचवीपी) टीकाकरण किया जा रहा है। टीकाकरण से पूर्व स्वास्थ्य विभाग की ओर से किशोरियों व उनके अभिभावकों को आशा कार्यकर्ता व अध्यापकों के माध्यम से जागरूक किया गया है।
मातृ-शिशु अस्पताल के टीकाकरण केंद्र पर कुल 9 किशोरियों का टीकाकरण किया गया। इनमें मंडी सदर क्षेत्र के तलयाहड़ से 4, पंडोह से 2 और मंडी शहर से तीन किशोरियों ने अभिभावकों के साथ पहुंच कर टीकाकरण करवाया। जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉ. अतुल गुप्ता ने बताया कि शुक्रवार को मंडी जिले के सभी चिह्नित 69 केंद्रों पर कुल 207 किशोरियां का टीकाकरण किया गया। अब तक यह आंकड़ा 1044 पहुंच गया है। रविवार को भी सभी चिन्हित केंद्रों पर टीकाकरण किया जाएगा।
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एचवीपी वैक्सीनेशन करवाने से पूर्व आशा कार्यकर्ता लाजवंती ने परिजनों से बात कर टीकाकरण के बारे में जागरूक किया। क्योंकि सोशल मीडिया पर वैक्सीनेशन को लेकर तरह तरह के बातें कही जा रही थी। आशा के प्रोत्साहित करने पर सभी शंकाएं दूर होकर माता जी के साथ अस्पताल पहुंच कर टीकाकरण करवाया है। -चारूल सकलानी, निवासी जागर पंडोह
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वैक्सीन को लेकर सोशल मीडिया और अखबारों के माध्यम से जानकारी मिली है। पहले तो इसे लगवाने में डर सा लग रहा था, लेकिन मम्मा और आशा के समझाने पर उनके साथ अस्पताल पहुंच कर टीका लगवाया है। आशा ने स्पष्ट किया है कि यह टीका हमें सर्वाइकल कैंसर के साथ अन्य रोगों से बचाता है। वैक्सीनेशन करवाने के बाद किसी तरह की कोई शंका नहीं रही, 15 वर्ष तक की सभी किशोरियों को इसे लगवाना चाहिए। सभी अस्पतालों में इसे निशुल्क लगाया जा रहा है।- तामेश्वरी राणा, निवासी पंडोह
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किशोरी तामेश्वरी की मां द्रोपदी व चारूल की मां कौशल्या ने बताया कि वैक्सीनेशन से पूर्व किशोरियों में डर था, उन्हें समझाने के बाद ही वह वैक्सीनेशन के लिए तैयार हुई। आशा कार्यकर्ता शांता कात्यायन, किरन, सीमा, लाजवंती आदि ने बताया कि अभी किशोरियों व उनके परिजनों को बेहतर ढंग से जागरूक करने की जरूरत है। यदि विभागीय टीम उन्हें जागरूक करे तो शायद अभिभावक अपनी बच्चियों का वैक्सीनेशन करवाने आगे आएं। किशोरियों से ज्यादा उनके अभिभावकों में वैक्सीनेशन के बारे में कई तरह की भ्रांतियां हैं।