पधर/मंडी। तीन दिन की बारिश से दरके पहाड़ हाईवे के यातायात के लिए आफत बन गए। पठानकोट-मंडी-मनाली से लेह को जोड़ने वाले हाईवे पर जहां सैकड़ों यात्रियों को वाहनों में रात गुजारनी पड़ी। वहीं, दूसरे दिन शनिवार की शाम हाईवे बंद होने से फिर आफत आ गई। हालांकि बाद में यातायात को वैकल्पिक रूटों से डायवर्ट कर दिया गया लेकिन यात्रियों की दुश्वारियां सातवें आसमान पर रहीं।
दरअसल, कोटरोपी और मैगल के पास पहाड़ी खिसकने से हाईवे मलबे के नीचे दब गया। देर रात डेढ़ बजे अचानक पहाड़ी का मलबा आने से हाईवे के दोनों तरफ के वाहन जहां तहां फंस गए। बारिश के जारी रहने से मलबे को हटाने का काम नहीं चलाया जा सका। ऐसे में शुक्रवार रात डेढ़ बजे से लेकर शनिवार सुबह सवा आठ बजे तक वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं। रात भर लोग हाईवे खुलने का इंतजार करते रहे। यात्री वाहनों में सवार बुजुर्गाें और बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानी हुई। हालांकि सुबह होने पर हाईवे बहाली से यातायात को बहाल कर दिया गया। भूस्खलन होने से जोखिम बढ़ने के बावजूद हाईवे पर वाहनों की आवाजाही शनिवार दिन के समय जारी रही। लेकिन शाम को फिर से मलबा आने की आशंका पर हाईवे का यातायात बंद कर दिया गया। वाहनों को वैकल्पिक मार्गो घटासनी से झंटिगरी वाया घोघरधार और पधर से जोगिंद्रनगर वाया नौहली सड़क से भेजना पड़ा। भूस्खलन के खतरे को देखते हुए जिला प्रशासन ने यातायात को पूर्ण से बंद कर दिया। लोक निर्माण विभाग द्रंग के सहायक अभियंता दिविज शर्मा ने बताया कि मैगल के पास हाइवे बंद होने की सूचना विभाग को रात करीब पौने दो बजे मिली। मैगल के पास मार्ग को इस वर्ष ही चौड़ा किया गया है। करीब दो सौ मीटर का एरिया पहाड़ी के काटने से स्लाइडिंग जोन बना हुआ है। शनिवार सुबह करीब सवा आठ बजे मैगल के पास हाइवे को यातायात के लिए बहाल कर दिया गया। वहीं, एसडीएम पधर डॉ. आशीष शर्मा ने लोगों से सहयोग की अपील की है। उन्होंने कहा कि भू-स्खलन के चलते यातायात को वैकल्पिक मार्गो से शुरू किया गया है।