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मंडी में वंशवाद की कसौटी पर खरे उतरने को तैयार दो पितामाह

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मंडी। विधानसभा क्षेत्र मंडी सदर सीट पर वंशवाद की कसौटी पर खरा उतरने की चुनौती होगी। भाजपा का हाथ थामने के बाद पंडित सुखराम के बेटे अनिल शर्मा मिशन रिपीट की तैयारियों के साथ चुनाव मैदान में कूदे हैं वहीं, स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह की बेटी चंपा ठाकुर सुखराम परिवार के वर्चस्व वाली सीट को फतेह करके विधानसभा चुनावों में दमदार एंट्री मारने की तैयारी में है। लेकिन, दल बदलने के बाद सियासी कोहराम के बीच हॉट सीट के रूप में उभरी मंडी सदर की सीट में असल मुकाबला पंडित सुखराम और कौल सिंह ठाकुर के बीच वंशवाद की कसौटी में खरे उतरने का होगा। हालांकि, स्वास्थ्य मंत्री के लिए यह चुनौती काफी अधिक होगी। क्योंकि कांग्रेस के वर्चस्व वाली अपनी द्रंग विस क्षेत्र की सीट के साथ उन्हें अपनी बेटी को जिताने के लिए मंडी सीट पर भी फोकस करना होगा। ऐसे में मंडी सदर में मुकाबला रोचक होगा। बदले राजनीतिक हालातों में दोनों परिवार पूरी तरह से आमने सामने होंगे।
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दोनों पिता अपनी सीटों से सिर्फ 1990 में ही एक बार हारे
1990 के विधानसभा चुनावों को छोड़ सदर मंडी में हमेशा सुखराम का परिवार ही जीता है। इन चुनावों में भाजपा के कन्हैया ने इस परिवार को पटकनी दी थी। मंडी सदर की सीट तब महज अढ़ाई वर्ष के लिए भाजपा के पास रही है। कांग्रेस से अलग होकर हिविकां के गठन के बाद भी मंडी सीट पर सुखराम परिवार छाया रहा। दूसरी तरफ द्रंग सीट पर कौल सिंह ठाकुर का दबदबा रहा है। 1977 से लेकर 2012 में स्वास्थ्य मंत्री केवल 1990 में ही हारे हैं। अढ़ाई साल तक यह सीट भाजपा के दीनानाथ के पास ही रही।

कांग्रेस ने भ्रष्टाचार पर की सुखराम परिवार की घेराबंदी
पूर्व दूरसंचार मंत्री सुखराम का मंडी में परचम लहराने के साथ भ्रष्टाचार के आरोपों ने भी दामन नहीं छोड़ा। 1998 में कांग्रेस से अलग होकर हिमाचल विकास कांग्रेस का गठन और बाद में भाजपा के साथ मिलकर सूबे में सरकार खड़ी करने और अब भाजपा का हाथ थामने पर कांग्रेस सुखराम परिवार को घेरने जा रही है। कांग्रेस जिला प्रभारी दीपक शर्मा ने कहा कि मोदी सरकार भ्रष्टाचार मुक्त भारत और सरकार की बात करती है, लेकिन सजा का फैसला सुन चुके भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे परिवार के साथ ही भाजपा ने हाथ मिलाकर अपनी ही बात झुठलाई है और भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया है। सुखराम परिवार और भाजपा को इन्हीं मुद्दों पर घेरा जाएगा।
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भाजपा की तय रणनीति के तहत ही मोर्चाबंदी
दूसरी तरफ भाजपा में शामिल पंडित सुखराम परिवार का परिवार भाजपा की तय रणनीति पर ही चलकर मोदी फेक्टर को ध्यान में रखकर कांग्रेस की मोर्चाबंदी करेगा। हालांकि, कांग्रेस पर अपने परिवार के तिरस्कार का मुद्दा भी उठाएगा। लेकिन, जहां तक मंडी में विकास कार्यों की बात है, यह कार्ड सुखराम परिवार कम ही चला रहा है। तमाम विकास कार्य पंडित सुखराम के कांग्रेस में केंद्रीय मंत्री और बेटे अनिल शर्मा के कांग्रेस में रहते हुए कैबिनेट मंत्री के दौरान ही हुए हैं। मंत्री अनिल शर्मा का कहना है कि उनका परिवार पाक साफ है। जहां उन्हें और उनके परिवार को सम्मान मिलेगा, वहीं जाएंगे। भाजपा की तय रणनीति के साथ पिता के दिशानिर्देशों की पालना भी वह करेंगे।
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