मंडी । श्रावण मास शुरू होते ही पहले सोमवार को भगवान शिव के जयकारों से छोटी काशी के मंदिर गूंजायमान हुए। हिंदू धर्म में श्रावण माह को भगवान शिव की पूजा के लिए महत्वपूर्ण माना गया है। इसी आस्था के साथ भगवान शिव की पूजा अर्चना की जाती है। शिव भक्तों ने भगवान शिव के लिए व्रत की शुरुआत की और मनचाहे वरदान के लिए पूजा पाठ शुरू किया। शहर के बाबा भूतनाथ मंदिर, रुद्र एकादश, महामृत्युंजय और पंचवक्त आदि मंदिरों में शिव भक्तों का जमावड़ा रहा। सोमवार सुबह कपाट खुलते ही मंदिरों में पूजा पाठ का क्रम शुरू हो गया। देर शाम तक मंदिरों में भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं। सांस्कृतिक राजधानी के नाम से जानी जाने वाली छोटी काशी में श्रावण मास काफी धूमधाम से मनाया जाता है। पूरे माह मंदिरों में भंडारे और विशेष पूजा अर्चना आयोजित की जाती है।
सुंदरनगर के भोजपुर स्थित श्री गोपाल मंदिर, महादेव स्थित प्राचीन शिव मंदिर, डोडेश्वर महादेव मंदिर, महामाया मंदिर, बाड़ी कुलवाड़ा में शिव गुफा और आसपास के मंदिरों में श्रावण मास की पूजा के लिए देवालयों में विशेष इंजताम किए गए है। भनवाड़ पंचायत में स्थित श्री सत बाड़ा देव मंदिर में श्रावण माह उत्सव सोमवार को श्रीमद्भागवत सप्ताहिक ज्ञान महायज्ञ के साथ आरंभ हुआ। इस मौके पर सुबह 7 बजे कलश यात्रा आयोजित की गई। मंदिर कमेटी के कारदार कर्म सिंह ने बताया सोमवार 16 जुलाई से लेकर शनिवार 21 जुलाई तक रोजाना मंदिर में सुबह 7 बजे से 11 बजे तक मूल पाठ का आयोजन होगा।
यह है मान्यता
माना जाता है श्रावण माह में की गई भगवान शिव की पूजा बहुत ही फलदायी होती है और इसका फल बहुत जल्द मिलता है। इस दौरान पड़ने वाले सभी सोमवार को व्रत के लिए बहुत खास माना जाता है जिन्हें श्रावण सोमवार और सावन सोमवार व्रत के नाम से जाना जाता है। बहुत से भक्त श्रावण माह के पहले सोमवार से 16 सोमवार के व्रत शुरू करते है। क्योंकि 16 सोमवार के व्रत श्रावण के पहले सोमवार से ही प्रारंभ किया जाता है। श्रावण माह के सभी मंगलवार व्रत देवी पार्वती के लिए किए जाते हैं। सावन माह में किए जाने वाले मंगलवार व्रत को मंगला गौरी व्रत भी कहा जाता है। सावन माह की शिवरात्रि और हरियाली अमावस्या भी श्रावण माह के महत्वपूर्ण पर्वों में से एक है।