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बारिश के लिए किसान देव पशाकोट की शरण में

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बरोट/ पधर(मंडी)। नवंबर माह तक बारिश न होने के कारण किसानों की खेती मुरझाने लगी है। काफी हद तक किसानों की आर्थिकी मौसमी खेती पर ही निर्भर है लेकिन, इस बार मौसम की बेरुखी से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई है। खासकर चौहारघाटी में किसानों की पैदावार सबसे अधिक प्रभावित होने के आसार हैं। लिहाजा अब किसान बारिश के लिए देव पशाकोट की शरण में हैं।
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चौहारघाटी के किसानों की फसलें लहसुन, सरसों, गंदम आदि दो माह से बारिश न होने के चलते सूखने लग गई हैं। वहीं इन फसलों का रंग भी पीला पड़ने लगा है। किसानों को अब इसकी चिंता सता रही है कि कहीं उनकी फसलें बर्बाद न हो जाएं, इसके लिए वह बारिश के देवता देव पशाकोट के सीला डेरा, नाल डेरा, पंजोड़ में बारिश के लिए पूजा-अर्चना कर रहे हैं। क्षेत्र के किसानों ने भारी मात्रा में लहसुन की बिजाई की है। किसानों में राम सरन, प्रेम चंद, नाथ, मंगत राम का कहना है कि लहसुन की आजकल गुड़ाई हो जाती थी, लेकिन बारिश न होने से यह पीला होकर सूखने लगा है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि देवता शीघ्र ही मेहरबान होकर बारिश करेंगे।

पशाकोट देव से जुड़ी यह है धारणा
चौहारघाटी के तीन मुख्य देवता हैं। जिसमें बड़ादेव हुुरंग नारायण, देव कढ़ौणी नारायण और घाटी देव वजीर पशाकोट हैं। जब भी सूखा पड़ता है तो किसान इन देवताओं की शरण में जाते हैं। ऐसी मान्यता है कि बारिश की देवियां इन देवों के अंग संग रहती हैं। जब भी बारिश की जरूरत होती है तो इन देवताओं को पहले मनाया जाता है। जिसके बाद देव इन देवियों को मनाते हैं और बारिश होती है।
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