सुंदरनगर (मंडी)। गीता कर्म का उपदेश देता है, महाभारत युद्ध को जीतने की कला सिखाता है। रामायण मनुष्य को मर्यादित जीवन जीना सिखाती है और इन सभी ग्रंथों का सार श्रीमद्भागवत है। ये बात श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के अंतिम दिन भौण-कलौहड़ स्थित शीतला माता मंदिर में कथा व्यास शशांक कृष्ण कौशल ने अपने प्रवचन में कही। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत सत्य की कथा है। सभी धर्मों का मूल सत्य है। आगे कहा कि आप सरल हैं तो ईश्वर सरलता से मिलेंगे, जो सरल नहीं हैं उनका जीवन गरल है। कोई भी धनवान हो सकता है, बलवान हो सकता है, विद्वान हो सकता है, लेकिन सरलता के बिना उनके पास गुण व्यर्थ है। मनुष्य जीवन ही परोपकार के लिए होता है। इसका उपयोग धर्म के लिए है। कर्म के बिना जीवन व्यर्थ है। यह शरीर ब्रह्मानंद के उपयोग के लिए है। जिसने इसका उपयोग नहीं किया, मानो उसने बहुमूल्य अवसर को खो दिया। अवसर का उपयोग नहीं करने वाले मानव का जीवन भार है। उन्होंने कहा कि जीवन तो पशु को भी मिलता है, लेकिन उसे मानव कल्याण का मौका नहीं मिलता है। दुनिया में मनुष्य पूरे संसार को जीत लेता है, लेकिन स्वयं अपने परिवार के सदस्यों के बारे में कहते हैं कि मेरा बेटा सुनता नहीं है। अपने मन की करते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि वे यथार्थ को नकार कर स्वयं को सत्य मानते हैं। इस मौके पर मंदिर कमेटी के प्रधान मिलाप चंद और महासचिव बाल चंद वालिया ने कथा व्यास शशांक कृष्ण कौशल को कमेटी की ओर से सम्मानित भी किया। इससे पूर्व मंदिर में आयोजित यज्ञ में उपायुक्त मंडी मदन चौहान ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत करते हुए पूर्णाहुति डाली। यज्ञ और कथा के समापन पर मंदिर परिसर में सुबह 10 बजे से भंडारे का भी आयोजन किया गया। गौरतलब है कि शीतला माता मंदिर का भंडारा जिला मंडी में होने वाले सभी भंडारों में प्रथम स्थान पर है, जिसमें करीब 30 हजार से अधिक लोग प्रसाद ग्रहण करते हैं।