धर्मपुर (मंडी)। निजी स्कूल संचालकों की हर सेशन में फीस और पाठ्य सामग्री के नाम पर की जा रही मनमानी पर शिक्षा विभाग ने शिकंजा कस दिया है। शिकायतों की जांच के लिए शिक्षा विभाग की टीम ने वीरवार को जिला मंडी के धर्मपुर क्षेत्र के निजी स्कूलों में औचक निरीक्षण किया और रिकार्ड जांचे। कुछ स्कूलों के रिकार्ड भी कब्जे में लेने की सूचना है। हालांकि, किसी बड़ी अनियमितता का खुलासा तो नहीं हुआ है। इस कार्रवाई से स्कूल प्रबंधकों में हड़कंप मचा हुआ है। हाल ही में जिला परिषद की बैठक में भी निजी स्कूलों की मनमानी का मुद्दा धर्मपुर क्षेत्र से भी उठ चुका है।
गौर हो कि है कि अभिभावकों को हर साल जेबें ढीली करनी पड़ती है। यही नहीं स्कूल वर्दी, किताबें और स्टेशनरी आदि को भी स्कूल में ही नियमों को ताक पर रखकर महंगी कीमतों में अभिभावकों को थमाया जाता है। या फिर किसी चिन्हित दुकानों का हवाला देकर वहीं से सामान खरीदने पर विवश किया जाता है। इसी कड़ी में टीम ने धर्मपुर विस क्षेत्र में निजी स्कूलों का औचक निरीक्षण कर इनका रिकार्ड खंगाला है। टीम यह साक्ष्य जुटाने में लगी है कि निजी स्कूलों द्वारा कितनी फीस और पाठ्य सामग्री के नाम पर अन्य राशि वसूल की जाती है। निजी स्कूलों की मनमानी का मामला मंडी का ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश का है। विभाग की इस कार्रवाई से क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। पैहड़ वार्ड से जिला परिषद सदस्य एडवोकेट संतोष कुमार ने बताया कि उन्होंने इस मामले को जिला परिषद की बैठक में उठाया था, क्योंकि बच्चों के अभिभावकों ने उनसे शिकायत की थी कि क्षेत्र के निजी स्कूल उनके बच्चों से ट्यूशन के नाम पर हजारों रुपये वसूल रहे हैं तथा पाठशाला से ही किताबें, कापियां व पाठशाला में प्रयोग होने वाली पूरी सामग्री दी जा रही है, जिससे बच्चों के अभिभावकों की जेब पर भारी बोझ पड़ रहा है। गौर हो कि नर्सरी से लेकर जमा दो तक जो अध्यापक इन स्कूलों में रखे गए हैं, उनमें ज्यादातर बोर्ड द्वारा निर्धारित मापदंडों को पूरा नहीं करते हैं।
धर्मपुर के स्कूलों में दबिश, रिपोर्ट के बाद होगी कार्रवाई: अशोक शर्मा
शिक्षा उपनिदेशक का कहना है कि शिक्षा विभाग पूरे जिला में ऐसे औचक निरीक्षण रहा है, लेकिन धर्मपुर विस क्षेत्र से ऐसी शिकायतें मिली थी कि यहां निजी स्कूल तय मानदंडों से ऊपर बच्चों के अभिभावकों से ट्यूशन फीस के नाम पर राशि वसूल कर रहे हैं। पाठशाला से ही किताबें, कापियां व अन्य सामग्री दी जा रही है, जिसकी जांच की जा रही है, जैसे ही रिपोर्ट आएगी और यह मनमानी का मामला बनता है तो फिर शिक्षा विभाग ऐसे स्कूलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगा।