2017 छोटी काशी मंडी के इतिहास में लिख गया नई सियासी इबारत
पहले प्रचार तो बाद में सूबे की राजनीति का केंद्र बिंदु बना मंडी
पीएम समेत देश की दिग्गज राजनीतिक हस्तियों से मंडी रहा गुलजार
वीरभद्र और सुखराम की रार 20 साल बाद फिर हुई ताजा
कभी न हारा सुखराम परिवार इसी साल भाजपा का हुआ
मंडी में जोरदार तख्ता पलट, कांग्रेस को गंवानी पड़ी सारी सीटें
अखिलेश महाजन
मंडी।
साल 2017 ने छोटी काशी मंडी के इतिहास में नई राजनीतिक इबारतें गढ़ी हैं। चुनावी वर्ष में सियासी तूफान के भंवर में नेता फंसे दिखे। दल बदलने और पासा पलटने की राजनीति भी उफान पर रही। लेकिन, सियासी घमासान मंडी में कांग्रेस को उखाड़कर ही थमा। तमाम उतार चढ़ाव के बाद सियासी तस्वीर मंडी का सीएम बनकर ही साफ हुई। सिराज के विधायक जयराम को प्रदेश मुख्यमंत्री की गरिमामयी कुर्सी की ताजपोशी मिली। इतिहास में पहली बार मंडी की जनता इन सुनहरे ऐतिहासिक पलों का गवाह बनी।
वर्ष 2017 राजनीतिज्ञों के लिए काफी अहम रहा। कांग्रेस की वीरभद्र सरकार का कार्यकाल इसी वर्ष पूरा होना था। प्रदेश में 10 सीटों के साथ मंडी प्रदेश का दूसरा दमदार जिला था। लिहाजा राजनीति के पंडितों की नजर इसी पर थी। 15 विस सीटों वाले कांगड़ा में भाजपा को कमजोर आंकने वाले राजनीति के पंडित की मंडी में नजरें गढ़ गईं। साल भर प्रदेश की सांस्कृतिक राजधानी के नाम से मशहूर मंडी की पावन धरती प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाम, राजनाथ सिंह और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी जैसे दिग्गज नेताओं का आवाजाही से प्रचार का केंद्र बना रहा। तो साल के अंत में भाजपा के सत्ता में काबिज होते ही सूबे की पालिटिक्स का केंद्र बिंदु बन गया। चुनावी दौर में वीरभद्र सिंह को सीएम का चेहरा घोषित करने का सबसे पहले दांव राहुल गांधी ने मंडी के ऐतिहासिक पड्डल मैदान में ही चला। तो अमित शाह मां शिकारी देवी की धरती सिराज से विधायक जयराम को बड़ी जिम्मेवारी देने की घोषणा करके सबको हतप्रभ कर गए।
चुनावी दांवपेचों के बीच राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले मंडी में सुखराम परिवार को भाजपा खेमे में करके भाजपा के शीर्ष नेतृत्व में उथलपुथल मचाई। कांग्रेस के कैबिनेट मंत्री और सुखराम के बेटे अनिल शर्मा परिवार समेत भाजपा के हुए। वहीं सुंदरनगर में प्रधानमंत्री ने रैली करके प्रचार अभियान को दमदार तरीके से समेटा। सुखराम फेक्टर मंडी सदर के साथ जिला भर में चला। न केवल कांग्रेस ने हारकर अभेद्य किला मंडी को खोया। बल्कि दो मंत्री स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह और आबकारी एवं कराधान मंत्री प्रकाश चौधरी और दो सीपीएस सोहन लाल और मनसा राम ने अपने अपने विस क्षेत्रों से सीटें हारीं और मंडी जिला में कांग्रेस 10-0 से निपट गई। अब भाजपा के कैबिनेट में सीएम समेत तीन विधायक शामिल हैं। जिससे न केवल मंडी का राजनीतिक कद बढ़ा है। बल्कि यहां विकास के आयाम भी स्थापित होने की जनता को आस है।
कब क्या हुआ
18 अगस्त को वीरभद्र से उखड़ा सुखराम परिवार
वर्ष 1998 के बाद वर्ष 2017 में कांग्रेस सरकार के सीएम वीरभद्र सिंह और राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले पंडित सुखराम विपाशा सदन में एक ही मंच पर आमने सामने हुए। वीरभद्र सिंह ने पंडित सुखराम को भरी सभा में आया राम गया राम कह दिया तो पंडित सुखराम ने वीरभद्र पर निशाना साधते हुए कांग्रेस को व्यक्ति विशेष की सरकार कह दिया। इसी मंच पर हिमाचल प्रभारी सुशील कुमार शिंदे और सांसद रंजीता रंजन भी मौजूद रही।
7 अक्तूबर को राहुल ने वीरभद्र को भावी सीएम का चेहरा किया घोषित
7 अक्तूबर को राष्ट्रीय अध्यक्ष उस समय उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने पड्डल में जनसभा की। उन्होंने वीरभद्र को भावी सीएम का चेहरा घोषित किया और उन्हीं के नेतृत्व में चुनाव लड़ने की घोषणा की। इस दौरान उन्होंने गुजरात मॉडल की तुलना करते हुए हिमाचल सरकार से की और निशाना साधा। वहीं इस रैली में पंडित सुखराम को नहीं बुलाया गया। हालांकि सुखराम मंडी में ही मौजूद रहे। लेकिन उन्हें तरजीह नहीं दी गई।
15 अक्तूबर को सुखराम परिवार भाजपा में शामिल
आचार संहिता से ठीक तीन दिन बाद सुखराम परिवार भाजपा का हुआ। पंद्रह दिन पहले विपाशा सदन में सुखराम को आया राम गया राम कहना और बाद में राहुल गांधी की रैली में पंडित सुखराम को न बुलाने को आधार मानकर कांग्रेस के कैबिनेट मंत्री और सुखराम के बेटे अनिल शर्मा ने परिवार समेत भाजपा में शामिल करके सूबे की राजनीति में उथल पुथल मचा दी। इसके बाद मंडी जिला में कांग्रेस को साफ करने का परिवार समेत अभियान छेड़ दिया।
1 नवंबर को शाह बोले, जयराम को मिलेगी बड़ी जिम्मेवारी
थुनाग के सैणी मैदान में चुनाव प्रचार के दौरान अमित शाह ने सिराज के विधायक जयराम ठाकुर को बड़ी जिम्मेवारी देने की घोषणा की थी। इसके बाद चुनावी प्रचार ने जोर पकड़ा। तब भाजपा में सीएम का चेहरा घोषित हो चुका था। पहले शाह और बाद में जेपी नड्डा के इसी बयान के बाद प्रदेश की राजनीति की नजरें जयराम ठाकुर पर टिकी थीं। इस दौरान राजनाथ सिंह और योगी आदित्यनाथ ने भी ताबड़तोड़ रैलियां कीं।
4 नवंबर को मोदी ने सुंदरनगर में रैली निकाल समेटा प्रचार
4 नवंबर को सुंदरनगर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनसभा करके वोटरों की नब्ज टटोली और वीरभद्र सरकार पर जमकर हमला बोला। इस दौरान उन्होंने बुहचर्चित फोरेस्ट गार्ड होशियार सिंह की मौत और गुड़िया रेप और मर्डर के मामले को उठाकर प्रदेश की कानून व्यवस्था पर निशाना साधा और जनता से न्याय की मांग करते हुए भाजपा के पक्ष में वोट मांगे। इसी तरह चुनाव थमा।
9 नवंबर को हुई 73.58 मतदान
मंडी में नौ नवंबर को मतदान प्रक्रिया शांतिपूर्वक संपन्न हुई। 73.58 फीसदी मतदान के साथ जनादेश ईवीएम और वीवीपैट मशीनों में कैद हुआ। सिराज में 82, बल्ह में 80, नाचन में 78.37, सुंदरनगर में 76.29 और मंडी में 73.27 पोलिंग रिकार्ड हुई। सबसे अधिक पोलिंग सिराज में हुआ।
18 दिसंबर को मंडी में कांग्रेस का सूपड़ा साफ
18 को मंडी के जनादेश ने कांग्रेस की जड़े उखाड़ दीं। कांग्रेस 10 में से एक भी सीट पर काबिज नहीं हो सकी। कई दिग्गज हारे तो वहीं सदर की सीट कांग्रेस ने अरसे के बाद खोई। सबसे अधिक जीत के अंतर का रिकार्ड मंडी के नाचन विस क्षेत्र के विधायक को मिला। जबकि बल्ह के इंद्र सिंह के अलावा धर्मपुर के महेंद्र सिंह, सिराज के जयराम ठाकुर ने 10 हजार से अधिक मतों के अंतर से जीत हासिल की।
21 दिसंबर को मंडी के जयराम हुए सीएम के लिए फाइनल
18 को जनादेश में भाजपा के मुख्यमंत्री का चेहरा प्रोफेसर प्रेम कुमार धूमल हार चुके थे। ऐतिहासिक जीत देने के बाद अब मंडी की जनता की निगाहें सीएम की कुर्सी पर टिकी थी। 21 दिसंबर को ठाकुर जयराम का नाम फाइनल होने पर देर शाम मंडी में जश्र का माहौल हो गया। आतिशबाजी छूटने लगी और बधाइयों का सिलसिला शुरू हो गया, लेकिन बाद में सीएम की ताजपोशी फिर फिसलने की चर्चा बन गई।
24 दिसंबर जयराम की घोषणा और 27 को राज्य अभिषेक
27 दिसंबर का दिन मंडी के राजनीतिक इतिहास में सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा। सिराज क्षेत्र के एक मिस्त्री के बेटे ने सीएम पद की शपथ ली। वहीं 24 को जयराम का नाम तय होने के बाद मंडी में जश्र का माहौल रहा। हर कोई इस खुशी में शामिल होने को आतुर दिखा। नाच-गाने, जश्न के साथ मंडी जिले के इतिहास में 2017 को ऐतिहासिक बनाया गया।