सुंदरनगर (मंडी)।
सुंदरनगर में लगाए गए अंडरग्राउंड सेंसरयुक्त डस्टबिन से सेंसर गायब हैं। पांच करोड़ की योजना में अभी तक शहर के 40 स्थानों पर भूमिगत डस्टबिन लगाए गए हैं लेकिन इनमें सेंसर नहीं है। लोगों को हाथ से ढक्कन खोलना पड़ रहा है। कूड़े से लबालब डस्टबिन का ढक्कन खोलने से गंदगी लोगों के हाथ लग रही है। इससे बीमारियां भी फैल सकती है। ऐसे में हैंड फ्री डस्टबिन करके स्वच्छता मिशन में नई क्रांति लाने वाली योजना प्रारंभिक चरण में ही सुंदरनगर में औंधे मुंह गिरी है। इस योजना के तहत जैसे ही कूड़ा लेकर इनके पास जाना था तो ढक्कन सेंसर की मदद से आटोमेटिक खुलने थे, लेकिन ऐसा नहीं हो पा रहा है। सुंदरनगर शहर में पांच करोड़ की लागत से स्थापित किए गए भूमिगत कूड़ादानों पर सवाल खड़े होने शुरू हो गए हैं।
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यह किया गया था दावा
दावा किया गया था कि भूमिगत डस्टबिन सेंसर युक्त होंगे। स्थापित किए गए डस्टबीन में सेंसर लगाए ही नहीं गए हैं। इससे स्थानीय लोग खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। शहरवासी चुनाव में फायदा लेने के लिए राजनीतिक दबाव में नगर परिषद पर आधा अधूरे काम का उद्घाटन करवाने का आरोप लगा रहे हैं।
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यहां के लिए थी यह योजना
सुंदरनगर, पांवटा साहिब और नगर निगम धर्मशाला में सेंसरयुक्त भूमिगत कूड़ादान योजना को केंद्र से स्वीकृति मिली है। इसके तहत इनमें करीब 150 कूड़ादान स्थापित किए जाने हैैं। इसमें से सुंदरनगर में प्रथम चरण में 40 स्थानों पर डस्टबिन स्थापित किए गए हैं। यहां पर करीब चार माह पहले डस्टबिन सुविधा को तो आरंभ कर दिया गया है, लेकिन इनमें सेंसर लगाया ही नहीं गया है। भूमिगत डस्टबिन योजना के अंतर्गत करीब 4.46 करोड़ रुपये की राशि खर्च की जा रही है।
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वीडियो कांफ्रेंसिंग से 23 सितंबर को वीरभद्र ने किया था शुभारंभ
23 सितंबर को तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने शिमला से वीडियो कांफ्रेंसिंग से इस योजना का उद्घाटन किया था। योजना के आरंभ होते ही नगर परिषद ने शहर से विभिन्न स्थानों पर रखे डस्टबिन उठा दिए थे।
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सेंसर नहीं लगाए, हो रही बातचीत : ईओ
सुंदरनगर नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी अशोक शर्मा ने कहा कि भूमिगत डस्टबिन स्थापित करने की योजना में सेंसर लगाने का प्रावधान है। कंपनी ने अभी तक सेंसर नहीं लगाए हैं। इसके कारण उनसे बातचीत की जा रही है। जल्द सेंसर लगाने के लिए कार्रवाई अमल में लाने को कहा गया है।
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