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फोरलेन के बाद टीसीपी के मुद्दे पर घिरेगी प्रदेश सरकार, रणनीति होगी तय

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मंडी। फोरलेन की मार झेल रहे प्रभावितों के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को अब टीसीपी व पांच मीटर कंट्रोल विड्थ की शर्त सताने लगी है। फोरलेन के मुद्दे बाद अब प्रदेश सरकार इस मुद्दे पर घिर सकती है। वायदे के बावजूद फोरलेन प्रभावितों को प्रदेश सरकार से वार्ता के लिए समय नहीं मिला है। अब ऐसे में टीसीपी के मुद्दे पर सरकार का घिरना तय माना जा रहा है। आगामी 21 सितंबर को कुल्लू में टीसीपी व पांच मीटर कंट्रोल विड्थ पर मंथन होगा। कुल्लू में आयोजित होने वाली इस बैठक में फोरलेन संघर्ष समिति आगामी रणनीति तैयार करेगी।
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फोरलेन संघर्ष समिति के अध्यक्ष सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर खुशाल ठाकुर ने कहा कि पूर्व सरकार ने बिना सोचे-समझे ग्रामीण क्षेत्रों पर टीसीपी का जंजाल थोप दिया। गत कांग्रेस प्रदेश सरकार के समय में डेवलपमेंट एरिया के नाम पर इसे लागू किया गया था, जो ग्रामीण क्षेत्रों में बेहद गलत है। इससे तो प्रदेश फोरलेन प्रभावित भूमिहीन हो जाएंगे। फोरलेन में पांच मीटर विड्थ और टीसीपी की तीन और दो मीटर की शर्तों से 10 मीटर तक पहुंच रहा है। ऐसे में जमीन से हाथ धो चुके प्रभावितों के पास घर बनाने के लिए भी जमीन नहीं बचेगी। उन्होंने संबंधित पंचायतों के माध्यम से सभी मुहालों को औट योजना क्षेत्र अथवा कुल्लू-भुंतर योजना क्षेत्र को पूरी तरह से बाहर करने का प्रस्ताव पास कर सरकार को भेजने अपील की है। फोरलेन संघर्ष समिति के महासचिव ब्रजेश महंत ने कहा कि डेवलपमेंट प्लान के नाम पर पूरे प्रदेश में टीसीपी की शर्तों को ग्रामीण क्षेत्रों पर थोपा गया है।
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