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33 सालों के बाद भी तहसील लाईबरेरी को नहीं मिला स्थायी ठिकाना

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सरकाघाट (मंडी)। सरकाघाट की तहसील लाइब्रेरी को 33 वर्ष बीत जाने पर भी स्थायी ठिकाना नहीं मिल पाया है। लोगों की मांग पर प्रदेश सरकार ने 1985 में यहां पर तहसील लाइब्रेरी स्थापित की गई थी। लेकिन, तब से लेकर आज तक इसे स्थायी ठिकाना और अन्य सुविधाएं नहीं मिल सकी हैं। इसके चलते यहां पर पाठकों की संख्या प्रतिदिन घटती जा रही है, जो चिंता का विषय है। पहले यह लाइब्रेरी सरकारी स्कूल में चलाई गई, तो कभी निजी भवन कुनालग मेें और अब यह सरकारी स्कूल के परिसर मेें चलाई जा रही है। लेकिन, अब यहां गर्ल स्पोर्ट्स हॉस्टल बनाए जाने के कारण राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला सरकाघाट के प्रधानाचार्य जेसी आजाद ने लाइब्रेरी सहायक को भवन को खाली करने के आदेश दे दिए हैं। इससे लाइब्रेरी में कार्यरत स्टाफ और पाठक परेशानी में पड़ गए हैं।
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पुस्तकालय को बार-बार शिफ्ट करने से रोष
बार-बार लाइब्रेरी को इधर-उधर शिफ्ट करने को लेकर पाठक ही नहीं, स्थानीय लोग भी खफा हो गए हैं। पुस्तकालय को स्कूल या कॉलेज में मर्ज करने तथा मुख्यालय से दूसरी जगह शिफ्ट करने के विरोध मे कई सामाजिक संस्थाएं और समाजसेवियों सहित पाठक और आम आदमी आगे आए हैं। इनमें नगर विकास समिति के अध्यक्ष सोहन लाल गुप्ता, सेवा संकल्प समिति के सचिव चंद्रमणी वर्मा, हवार्ड संस्था के अध्यक्ष राकेश कुमार, समाज सेवी अजय भवानी, राजेंद्र सूर्यवंशी, बसपा नेता बालम कौंडल, पूर्व नगर पंचायत उपाध्यक्ष अश्वनी गुलेरिया, हरिदास प्रजापति, जिला परिषद सदस्य भूपेंद्र ठाकुर आदि ने सरकार से मांग की है कि तहसील लाइब्रेरी को मुख्यालय में ही चलाया जाए और यहां पर सभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएं।
क्या कहते हैं प्रबंधन और प्रधानाचार्य
तहसील लाइब्रेरी की प्रभारी प्रवीण कुमारी ने कहा कि पाठकों की कोई कमी नहीं है, लेकिन सुविधाओं का अभाव है। वहीं, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला के प्रधानाचार्य जेसी आजाद ने बताया कि स्कूल क्वार्टर भवन में गर्ल हॉस्टल चलेगा इसलिए लाइब्रेरी को यहां से खाली करवाया जाएगा। इसके आदेश भी जारी कर दिए गए हैं। उधर, सरकाघाट कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. श्याम सिंह ठाकुर का कहना है कि अगर लाइब्रेरी को दूसरी जगह नहीं मिलती तो मजबूरन इसे कॉलेज में ही शिफ्ट करना पड़ेगा।
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