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अग्नि पीड़ितों को टीन की छतों के नीचे काटनी होंगी सर्द रातें

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बालीचौकी (मंडी)। अग्निकांड में पुश्तैनी आशियाने स्वाह होने के बाद अब डाहर गांव के अग्नि पीड़ितों को टीन की छतों के नीचे कड़ाके की सर्दी काटनी होगी। दो सप्ताह के बाद प्रशासन ने प्रभावितों को टीन के अस्थायी आशियानों के बंदोबस्त की कवायद अंतिम चरण में तो पहुंचा दी है। लेकिन प्रशासन की सुस्त चाल के चलते अभी तक प्रभावितों को तहसील से आर्थिक मदद की दरकार है। कुछ प्रभावित अपने बच्चों के साथ तंबुओं में सर्द रातें गुजार रहे थे तो कुछ अपने सगे संबंधियों के पास ठहरे हुए हैं। इसके साथ ही इनके मवेशी खुले आसमान के नीचे राते काट रहे हैं। घटना के बाद हालांकि समाजसेवी संस्थाओं के अलावा प्रशासन ने भी इन लोगों की मदद की है। लोगों को कपड़े, कंबल और खाद्य सामग्री पहुंचाई गई है। लेकिन, करीब दो सप्ताह के बाद अब प्रशासन न तो इनके लिए अस्थायी शेड पूरी तरह से तैयार करवा रहा है, न ही आग से गांव के 33 प्रभावित परिवारों को तहसील कार्यालय से आर्थिक मदद पहुंचाई जा सकी है।
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दो से तीन दिन में अस्थायी शेड होंगे पूरे
डाहर गांव में सड़क के समीप ही सभी प्रभावित लोगों के लिए टीन की चादरों के अस्थायी शेड बनाने का कार्य इन दिनों प्रगति पर चल रहा है। कुल अस्थायी 28 निवासों का काम जोरों पर है जोकि 2 या 3 दिनों के भीतर पूरा कर लिया जाएगा। 30 अक्तूबर को बालीचौकी के डाहर गांव में आग लगने के बाद लोग खुले आसमान के नीचे रातें गुजारने को मजबूर हो गए थे। आग से उनकी सारी संपत्ति राख हो गई है और उनके पास सिर छुपाने के लिए कोई भी विकल्प नहीं बचा था।

प्रशासन दे रहा हर संभव मदद
तहसीलदार बालीचौकी अनिल ने प्रशासन की तरफ से अग्नि पीड़ित परिवारों की हर तरह से सहायता की जा रही है। सभी परिवारों को फिलहाल टीन की चादरों से 28 अस्थायी शेड बनाए जा रहे हैं। जिनका काम प्रगति पर है। वहीं, तहसील के माध्यम से इन परिवारों को 1 लाख 16 हजार की राशि 13 नवंबर तक सभी के खातों में डाल दी जाएगी।
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तो पक्के मकान और टीडी की लकड़ी भी
प्रशासन का दावा है कि अग्नि पीड़ित लोगों को अतिशीघ्र ही पक्के घर बनाने के लिए प्रयासरत है। इसके लिए वेलफेयर से धनराशि का इंतजाम कर लिया गया है। इसके लिए पीड़ित परिवारों के लोगों से फार्म भी भरवा दिए गए हैं। लोगों को जब तक पक्के मकान नहीं बन जाते, अस्थायी शेड का प्रबंध कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि टीडी के लिए भी एडीएम से बात की गई है।
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