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डेंगू का बढ़ा प्रकोप, 11 और चपेट में

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सुंदरनगर (मंडी)। जिले में डेंगू का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा है। मंगलवार को जिला मंडी में डेंगू के 11 नए मामले सामने आए हैं। इसमें 10 डैहर और एक बलद्वाड़ा क्षेत्र से संबंधित है। छह रोगियों का मंडी जोनल अस्पताल में डेंगू का टेस्ट हुआ है, जबकि पांच का बिलासपुर अस्पताल में टेस्ट हुआ। वहीं दिनों-दिन यहां पर मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। इसके कारण स्थानीय लोगों और साथ लगती पंचायतों में हड़कंप मचा हुआ है। सोमवार तक कुल 38 लोग डेंगू से पीड़ित थे। अब संख्या बढ़कर मंगलवार को 49 पहुंच गई है। मंगलवार को डैहर क्षेत्र से 25 लोगों के ब्लड सैंपल मंडी स्थित जोनल अस्पताल में जांच के लिए भेजे गए थे जिनमें से 6 लोग पॉजिटिव पाए गए हैं। बिलासपुर स्थित जोनल अस्पताल में भी मंगलवार को 5 और लोगों की रिपोर्ट पाजिटिव आई है।
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घर-घर जाकर किया जा रहा जागरूक
सोमवार को डैहर में डेंगू को लेकर विधायक राकेश जंवाल की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में लिए गए निर्णयों के बाद मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग ने डैहर, जांवला और बरोटी में 11 टीमों को डेंगू से बचाव बारे लोगों को जागरूक करने के लिए तैनात कर दिया है। टीमें घर-घर जाकर डेंगू से बचाव के बारे में लोगों को जानकारी प्रदान कर रही हैं। टीमें सबसे पहले उन क्षेत्रों में जा रही हैं जहां पर डेंगू के मच्छरों का लारवा चिह्नित किया गया है।

स्थिति पर नजर : डॉ. दिनेश
जिला स्वास्थ्य अधिकारी मंडी डॉ. दिनेश ने बताया कि मंगलवार को 25 नए टेस्टों में 6 लोग डेंगू पाजिटिव पाए गए हैं। इनका उपचार जोनल अस्पताल में आरंभ कर दिया गया है। बिलासपुर में पांच डेंगू पाजिटिव होने की सूचना है। स्वास्थ्य विभाग स्थिति पर पूरी नजर रखे हुए है।
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बारिश के कारण रुकी फॉगिंग
खंड स्वास्थ्य अधिकारी रोहांडा डॉ. धर्म सिंह ने बताया कि डैहर क्षेत्र में विभाग ने विभिन्न टीमों का गठन कर उन्हें लोगों को डेंगू के प्रति जागरूक करने के लिए लगा दिया है। मंगलवार को बारिश होने के कारण फॉगिंग का काम दोपहर बाद बंद करना पड़ा है।

घरों से बच्चों का निकलना मुश्किल
डैहर क्षेत्र में डेंगू के बढ़ते मामलों के बाद ग्रामीणों ने अपने छोटे बच्चों को घरों से बाहर निकालना बंद कर दिया है। यहां तक कि स्कूलों को बच्चों को भेजने में गुरेज किया जा रहा है। मच्छरों से बचने के लिए बच्चों को पूरे कपड़े और मच्छर भगाने के लोशन आदि लगाने की सलाह दी जा रही है। वहीं जो बच्चे स्कूल और कॉलेज जा रहे है, उनके शरीर को पूरी तरह से ढकने के बाद ही घर से बाहर भेजा जा रहा है।
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