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नेताओं की शह पर खनन माफिया के हाथ की कठपुतली बना सरकारी तंत्र

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- फोटो : अमर उजाला
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मंडी/नेरचौक। छोटी काशी मंडी में राजनेताओं की शह पर अवैध खनन और नियमों को ताक पर रखकर पहाड़ों का सीना छलनी करने का गोरखधंधा पनप रहा है। सरकारी तंत्र खनन माफिया के हाथ की कठपुतली बना हुआ है। रसूखदारी के इस खेल में सत्ता पर काबिज पार्टी के आकाओं के निर्देशों पर विपक्षी पार्टी के सगे संबंधियों के कामकाज निशाने पर होते हैं तो सत्ता से उतरते ही पासा पलट जाता है। ऐसे में कांग्रेस कार्यकाल में भाजपा और भाजपा के कार्यकाल में कांग्रेसियों के रिश्तेदारों और सगे संबंधियों के खनन के काम निशाने पर होते हैं। लेकिन, इस सब के बीच पहाड़ों का सीना छलनी करके पर्यावरण पर दाग लगाने का सिलसिला एक तरफ जारी रहता है। आलम यह है कि इस सबके के बावजूद अवैध खनन का गोरखधंधा फल फूल रहा है। क्रशरों से लेकर सीमेंट कंपनियों तक के खनन माफिया का नेटवर्क जुड़ा हुआ है। हालांकि, ऐसा नहीं की सभी काम नियमों को ताक पर रखकर हो रहे हैं। 26 पट्टों की नीलामी के दायरे में भी काम हो रहा है। लेकिन खनन के कार्य में भाजपा के कद्दावर नेताओं से लेकर कांग्रेस के आला नेताओं के रिश्तेदार या करीबी सगे संबंधी जुड़े हुए हैं।
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22 को सामने आएगा स्कोर क्रशर का सच
शहर के भ्यूली के साथ लगते स्कोर गांव में कांग्रेस के पूर्व मंत्री के बेटे के स्टोन क्रशर पर 2016 से चल रही कार्रवाई अब सत्ता बदलते ही अचानक तेज हो गई है। मंगलवार को प्रशासन, वन और खनन विभाग ने साइट का दौरा किया। लेकिन क्रशर पूरी तरह से बंद था। हालांकि इस स्टोन क्रशर की बिजली अगस्त 2017 में कट चुकी है। मंगलवार को बिजली नहीं काटी गई है। उधर, मौके पर जनरेटर सेट मिला है। जिसे पूरी तरह से कवर किया गया है। इस हैवी ड्यूटी जेनरेटर को क्यों लगाया गया है? इस संबंध में जांच हो रही है। लेकिन, 22 फरवरी को इस संबंध में संयुक्त टीम रिपोर्ट सौंपेगी।

तो विभाग क्यों खामोश रहा
बताया जा रहा है कि 2011 के बाद खनन लीज का नवीकरण नहीं हुआ है। अब सवाल यह उठ रहा है कि इतने सालों तक बिना नवीकरण के गोरखधंधा कैसे चलता रहा। ऐसे में अफसरशाही की मिलीभगत या नेताओं के दबाव को नकारा नहीं जा सकता। वहीं खनन विभाग की मानें तो 2016 में इस क्रशर को बंद करने के आदेश जारी किए जा चुके हैं। अब सवाल उठ रहा है कि इसके बावजूद यहा काम कैसे होता रहा। अचानक सत्ता बदलने के बाद कार्रवाई विभाग ने तेजी से शुरू कर दी। हालांकि विभाग का दावा है कि इस बीच शार्ट टर्म परमिट दिया जाता रहा। लेकिन बंद करने के फरमानों के बीच शार्ट टर्म परमिट पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
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यहां सक्रिय है खनन माफिया
मंडी, सुंदरनगर, नाचन और साथ लगते बल्ह विधानसभा क्षेत्र में खनन माफिया सक्रिय है। सुकेती खड्ड, कंसा खड्ड और इसके साथ लगती सहायक खड्डों में रोजाना मशीनों को देखा जा सकता है। वहीं खेत खलिहानों में भी अवैध खनन का खेल फल फूल रहा है। लेकिन इन पर विभाग एवं जिला प्रशासन अंकुश नहीं लगा पा रहा है। ऐसे में खनन माफिया के हौसले बुलंद हो गए हैं। भवन निर्माण के अलावा अन्य बड़े प्रोजेक्टों में नाचन और बल्हघाटी के रेत-बजरी की अधिक डिमांड रहती है। यहां से रोजाना हजारों टन रेत और बजरी की खेप आसपास के इलाकों व दूसरे जिलों में सप्लाई हो रही है। सुकेती खड्ड के किनारे मंगलाह से लेकर साई तक और बल्ह के गुटकर तक के दायरे में खनन माफिया धरती का सीना छलनी कर रहा है। यही नही नाचन क्षेत्र के काटली, हटगढ़, रड़ा, जंगमबाग, जलाह, चुनाहन, छलकी, डडोह, डिनक और डुगराई क्षेत्र में खड्डों के साथ उपजाऊ जमीन खनन की भेंट चढ़ रही है।

एक ट्राली से 1000 से 1500 की कमाई
एक अनुमान के मुताबिक सैकड़ों बेरोजगार संबंधित क्षेत्रों में अवैध खनन के कारोबार से जुड़े हैं। इनकी सियासी जड़ें भी काफी गहरी हैं। हालांकि पुलिस और प्रशासन खनन माफिया पर समय समय पर शिकंजा कसते रहते हैं। इसके बावजूद खनन का गोरखधंधा जोरों पर है। सैकड़ों बेरोजगार प्रत्यक्ष और प्रत्यक्ष रूप से इस खेल का हिस्सा बने हुए हैं।

25 खनन पट्टे 2.5 करोड़ में हुए हैं नीलाम
जिला में अवैध खनन रोकने के लिए विभाग ने जिलाभर में 26 खनन पट्टे नीलाम करने के लिए चिह्नित किए थे। विभाग ने 25 खनन पट्टों की नीलामी करवा दी है। यह खनन पट्टे विभाग ने 2 करोड़ 50 लाख रुपये में नीलाम कर दिए। विभाग ने खनन के लिए बल्ह, सदर, औट, थलौट, पनारसा व धर्मपुर में खनन पट्टे नीलाम करने के लिए चिह्नित किए थे। दावा किया जा रहा है कि नीलामी करने के बाद अब अवैध खनन से विभाग को छुटकारा मिलेगा। वहीं सरकार को इससे भारी राजस्व भी प्राप्त होगा। बल्ह क्षेत्र में 11 खनन पट्टे नीलाम हो चुके हैं। वहीं सदर, औट, थलौट व पनारसा में 7 खनन पट्टे और धर्मपुर में 8 खनन पट्टे चिह्नित किए गए थे जिनमें से 7 की नीलामी हुई व एक खनन पट्टे की नीलामी नहीं हो पाई।

22 को तस्वीर होगी साफ
उधर, जिला खनन अधिकारी राजीव कालिया का कहना है कि स्कोर गांव में स्थित स्टोन क्रशर में नियमों को ताक पर रखकर अधिक रेत बजरी का दोहन हुआ है। नियमानुसार क्रशर मालिक से जुर्माना लिया जाएगा। 22 को संयुक्त टीम जिसमें एसडीएम सदर, वन विभाग के डीएफओ शामिल हैं, मामले में अपनी रिपोर्ट रखेगी। जिसमें पूरे मामले में तस्वीर साफ होगी। अगर जरूरी हुआ तो नियमानुसार कार्रवाई करेगी। उन्होंने कहा कि विभाग सक्रिय है। खनन माफिया पर शिकंजा कसा जा रहा है। दूसरी तरफ क्रशर मालिक का कहना है कि क्रशर तो कई वर्षों से बंद पड़ा है। अब राजनीति द्वेष के चलते सारा प्रपंच रचा जा रहा है।
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