4.93 करोड़ रुपये की वार्षिक कार्य योजना
मंडी में 48 हजार किसान अपना रहे प्राकृतिक खेती
8,400 हेक्टेयर भूमि में किसान कर रहे प्राकृतिक खेती
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। जिले में प्राकृतिक खेती का दायरा लगातार बढ़ रहा है। अब तक 48,380 किसान प्राकृतिक खेती से जुड़ चुके हैं, जबकि 8,400 हेक्टेयर भूमि को इसके दायरे में लाया जा चुका है। प्राकृतिक खेती के विस्तार के लिए 4.93 करोड़ रुपये की वार्षिक कार्ययोजना प्रस्तावित की गई है। इसमें नए कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन (सीआरपी) की नियुक्ति, किसानों का प्रशिक्षण, जागरूकता कार्यक्रम, प्रोत्साहन राशि, प्राकृतिक खेती का प्रमाणन तथा अध्ययन सामग्री और किट का वितरण शामिल है।
जिले में 13 बायो रिसोर्स सेंटर (बीआरसी) भी स्थापित किए जाएंगे। 14 विकास खंडों में प्रस्तावित 20 नए क्लस्टरों के लिए सीआरपी का चयन किया जा चुका है। सुंदरनगर के घांघल निवासी किसान प्रताप सिंह ने बताया कि उन्होंने गेहूं के साथ मटर और चने की मिश्रित खेती शुरू की है। प्राकृतिक खेती से तैयार गेहूं पहले 60 रुपये किलो बिकता था, जो अब 80 रुपये किलो तक मिल रहा है। इसी तरह मक्की का दाम भी 40 से बढ़कर 60 रुपये किलो हो गया है।
ढंडोल निवासी मस्तराम ने मक्की, सोयाबीन, अदरक और हल्दी की प्राकृतिक खेती शुरू की है। इस वर्ष उन्होंने एक बीघा भूमि में ड्रैगन फ्रूट के पौधे भी लगाए हैं। उन्होंने पांच बीघा भूमि में प्राकृतिक खेती से तैयार गेहूं करीब 65 हजार रुपये और मक्की 25 हजार रुपये में सरकार को बेची।
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गाय खरीदने पर 25 हजार रुपये की सहायता
प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों को स्वदेशी नस्ल की गाय खरीदने पर 25 हजार रुपये की वित्तीय सहायता दी जाती है। गोमूत्र संग्रहण के लिए गोशाला का फर्श पक्का करने को 8 हजार रुपये तथा जीवामृत और घन जीवामृत तैयार करने के लिए तीन ड्रमों पर 2,250 रुपये का अनुदान दिया जा रहा है। जिले के लिए 4.93 करोड़ रुपये की वार्षिक कार्ययोजना तैयार की गई है। इसके तहत 13 बायो रिसोर्स सेंटर भी स्थापित किए जाएंगे। -हितेंद्र कुमार, उप परियोजना निदेशक (आत्मा), मंडी